नई दिल्‍ली, एजेंसियां। भारत में कोरोना की दूसरी लहर कहर बरपा रही है। देश के कई राज्‍यों में महामारी बेकाबू हो गई है। भारत को मुश्‍किल में फंसा देख उसके तमाम विदेशी मित्रों ने तेजी से मदद भेजनी शुरू कर दी है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, सिंगापुर, दुबई समेत दुनिया के तमाम मुल्‍कों से भारत की मदद के लिए हाथ आगे बढ़े हैं। कहीं से दवाएं, कहीं ऑक्सीजन प्लांट तो कही से वेंटिलेटर समेत दूसरे उपकरण भेजे जा रहे हैं। आइए जानते हैं कहां से कौन सी मदद भारत के लिए भेजी जा रही है।

जर्मनी देगा ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र

भारत में जर्मनी के राजदूत वाल्टर जे. लिंडनर (Walter J. Lindner) ने कहा कि महामारी में भारत ने टीकों और दवाओं का उत्पादन करके दुनिया और हमारी मदद की। अब हमें मुश्‍कि‍ल में फंसे दोस्तों की मदद करने की जरूरत है। हम भारत को एक बड़े ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र को भेजने के लिए तैयार हैं। इस संयंत्र से काफी लोगों को ऑक्सीजन मुहैया कराने में मदद मिलेगी। संयंत्र को यहां कैसे लाया जाए इस मसले पर हम विदेश मंत्रालय और रेड क्रॉस समेत अन्य के संपर्क में हैं।

सिंगापुर कर रहा हर तरह की मदद मदद 

सिंगापुर सरकार ने महामारी से जूझ रहे भारत की मदद के लिए बढ़चढ़ कर मदद की है। सिंगापुर ने ऑक्सीजन के कंटेनर और सिलेंडरों की खेप भेजी है। सिंगापुर की वायुसेना ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के लिए दो सी-130 विमानों से ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाए। सिंगापुर के विदेश मंत्रालय में उपमंत्री डॉ. मलिकी ओसमान ने बुधवार को भारतीय उच्चायुक्त पी कुमारन को ऑक्सीजन सिलेंडर से भरे दो विमान सौंपे। उन्होंने महामारी के समय सिंगापुर को जरूरी सामान की आपूर्ति करते रहने के लिए भारत सरकार का शुक्रिया भी अदा किया।

कनाडा, द. कोरिया और न्‍यूजीलैंड ने बढ़ाया हाथ 

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि उनका मुल्‍क भारत को एक करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद मुहैया कराएगा। उन्‍होंने बताया कि विदेश मंत्री मार्क गार्नो की इस संदर्भ में एस जयशंकर से बात हुई है। दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह भारत की मदद के लिए ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर और कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली किट एवं अन्य चिकित्सकीय सामानों की आपूर्ति करेगा। न्यूजीलैंड भारत की मदद के लिए रेड क्रॉस को करीब 7,20,365 अमेरिकी डॉलर की आर्थिक मदद मुहैया कराएगा।

अमेरिका हर तरह की मदद को तैयार  

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि अमेरिका भारत को हर वह मदद भेज रहा है जिसकी कोरोना के खिलाफ जंग में उसे जरूरत पड़ेगी। उन्होंने दोहराया कि भारत ने भी पिछले साल अमेरिका की मदद की थी जब अमेरिका कोरोना की पहली लहर की चपेट में था। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक अमेरिका की ओर से भेजी जा रही मदद में रेमडेसिविर और अन्य दवाएं भी शामिल हैं। अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने कहा कि हम कोविड वैक्‍सीन बनाने की प्रणाली के लिए जरूरी सामग्री और कलपुर्जों को भेज रहे हैं।

यूएन भी आया साथ, ब्रिटेन से आई मदद 

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरस के उप प्रवक्ता फरहान हक ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने भारत को अपने एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला के जरिए हर संभव मदद की पेशकश की है। इसको लेकर हमारे अधिकारी भारतीय अधिकारियों के संपर्क में हैं। ब्रिटेन से 100 वेंटिलेटर और 95 ऑक्सीजन संकेद्रक की खेप भारत पहुंच गई है। ब्रिटेन ने कहा है कि वह इस हफ्ते 495 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर, 120 नॉन इनवेसिव वेंटिलेटर और 20 मैनुअल वेंटिलेटर समेत अन्‍य जरूरी उपकरणों की आपूर्ति करेगा।

ऑस्‍ट्रेलिया और फ्रांस भी भारत के साथ 

ऑस्ट्रेलिया ने 500 वेंटिलेटर, 10 लाख सर्जिकल मास्क, पांच लाख सुरक्षात्मक मास्क, चश्मे और फेस शील्ड की आपूर्ति करने की बात कही है। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के कार्यालय की ओर से जानकारी दी गई है कि जरूरी सामानों की खेप इस हफ्ते भारत पहुंच जाएगी। इसमें आठ ऑक्सीजन जेनरेटर भी शामिल होंगे। बड़ी बात यह कि हर जेनरेटर में एक अस्पताल के 250 बेड के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति करने की क्षमता है। फ्रांस ने इस लड़ाई में भारत के साथ हर पल खड़ा रहने की बात भी कही है। 

रूस से जल्‍द आएगी मदद 

अमेरिका और रूस से चिकित्सा आपूर्ति की पहली खेप के गुरुवार को तक भारत पहुंच जाने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी पीटीआइ ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि चिकित्सा आपूर्ति लेकर एक अमेरिकी विमान के बृहस्पतिवार को पहुंचने की संभावना है जबकि रूसी विमान के बृहस्पतिवार रात तक पहुंचने की उम्मीद है। इस बीच पीएम मोदी ने बुधवार को रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की और मदद के लिए उनका शुक्रिया अदा किया। इससे पहले पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन से बात की थी।