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    मुक्केबाजी में ओलिंपिक पदक विजेताओं के छोटे से क्लब में लवलीना का स्वागत - विजेंदर सिंह

    By Viplove KumarEdited By:
    Updated: Thu, 05 Aug 2021 05:30 PM (IST)

    लवलीना ने विश्व नंबर दो तुर्की की बुसेनाज सुरमेनेली को टक्कर दी जिनके पास 69 किग्रा भारवर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में अच्छी योजना थी। लवलीना ने अपनी ओर से भरपूर कोशिश की लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं है कि बुसेनाज बेहतर मुक्केबाज साबित हुईं।

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    भारतीय महिला मुक्कबाज लवलीना ने जीता ओलिंपिक कांस्य मेडल - फोटो ट्विटर पेज

    विजेंद्र सिंह का कालम। मुक्केबाजी में भारतीय ओलिंपिक पदक विजेताओं के छोटे से क्लब में लवलीना बोरगोहेन का स्वागत करके मुझे बेहद खुशी हो रही है। एमसी मेरी कोम और मुझे 2016 रियो ओलिंपिक में किसी अन्य मुक्केबाज का इस क्लब में स्वागत करने का मौका नहीं मिला लेकिन टोक्यो में एक अच्छी मुक्केबाज का अपने पहले ही ओलिंपिक में पदक जीतना और इस क्लब में शामिल होना अच्छी बात रही। मुझे पूरी उम्मीद है कि वह 2024 के पेरिस ओलिंपिक में और बेहतर प्रदर्शन करेंगी।

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    लवलीना ने विश्व नंबर दो तुर्की की बुसेनाज सुरमेनेली को टक्कर दी, जिनके पास 69 किग्रा भारवर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में अच्छी योजना थी। लवलीना ने अपनी ओर से भरपूर कोशिश की, लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं है कि बुसेनाज बेहतर मुक्केबाज साबित हुईं। लवलीना ये बात समझेंगी कि कई बार आप जीतते हैं तो कई आप सीखते हैं।

    सवाल ये है कि एक ऐसे प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ जिनसे पहले कभी मुकाबला नहीं हुआ था, लवलीना जीतने के लिए और क्या बेहतर कर सकती थीं? ईमानदारी से कहूं तो दोनों के बीच चुनने में काफी कम अंतर था। शुरुआत में लवलीना के आक्रामक पंचों के बावजूद तुर्की की मुक्केबाज तीनों राउंड में अपनी योजना पर अमल करने में पूरी तरह कामयाब रहीं। ये बात साफ थी कि लवलीना पहले राउंड में दबदबा बनाना चाहती थीं। शुरुआती दो मिनट में उन्होंने अच्छा खेल दिखाया, लेकिन उसके बाद बुसेनाज ने पंचों की बारिश कर दी। इसके बाद बुसेनाज को पहला गेम कब्जाने में कोई समस्या नहीं हुई।

    मुझसे पूछा गया कि क्या इस मुकाबले में बुसेनाज ने खेलभावना का अपमान किया? तो मुझे लगता है कि ये खेल का हिस्सा है और हमें इसका जवाब एक मुस्कुराहट से ही देना चाहिए और किसी चीज से नहीं। एथलीट के इमोशंस कई बार खुलेआम जाहिर हो जाते हैं। ये सब उसी की प्रतिक्रिया होती है जो उनके अंदर चल रहा होता है। तो ये ठीक है। मैं कहूंगा कि लवलीना ने मुक्केबाजी टीम को टोक्यो से खाली हाथ लौटने से रोक दिया। हालांकि मुझे अमित पंघाल और विकास के प्रदर्शन से निराशा हुई, लेकिन 91 किग्रा. वर्ग के क्वार्टरफाइनल में चोटिल होने के बावजूद सतीश कुमार का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। वहीं मेरी ने 51 किग्रा भारवर्ग के क्वार्टरफाइनल में अच्छी टक्कर दी।

    फ्रीस्टाइल कुश्ती के 57 किग्रा भारवर्ग में रवि कुमार ने भारत के लिए रजत पदक पक्का किया। दीपक पूनिया और अंशु मलिक के पास भी कांस्य पदक जीतने का मौका है। नीरज चोपड़ा ने भी शानदार प्रदर्शन के साथ भाल फेंक के फाइनल में प्रवेश किया है। वहीं हाकी टीमों के पास भी अभी पदक जीतने का अवसर है। इसके अलावा विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया भी जल्द ही अपने-अपने मुकाबलों में उतरेंगे, ऐसे में भारतीय दल टोक्यो का शानदार अंत करने की ओर बढ़ रहा है।