नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। रेडियो और टीवी कमेंट्री का काम अपने आप में एक बड़ा चैलेंज होता है। अगर यह खेलों की कमेंट्री हो और उसमें भी ओलिम्पिक स्पोर्ट्स पर विश्लेषण के साथ कमेंट्री की जाये तो उसका मज़ा कुछ और ही होता है। वरिष्ठ खेल पत्रकार मनोज जोशी ऐसे ही एक टीवी कमेंटेटर हैं, जिन्होंने खासकर कुश्ती कमेंट्री के मायने ही बदल दिये हैं। तीन दशकों में उन्होंने खासकर कुश्ती की 550 घंटे से अधिक की टीवी कमेंट्री करके एक कीर्तिमान कायम किया है जिसे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह मिली है। 

पांच ओलिम्पिक, पांच एशियन गेम्स, दो कॉमनवेल्थ गेम्स, दस से ज़्यादा कुश्ती की नैशनल चैम्पियनशिप और सौ से ज़्यादा दंगलों में उनकी टीवी कमेंट्री को खूब सराहा गया है। इसके अलावा ऐज ग्रुप एशियाई और वर्ल्ड चैम्पियनशिप और प्रो रेसलिंग लीग में लच्छेदार भाषा में उनकी कमेंट्री पहलवानों के बीच काफी चर्चित हुई है। दंगल फिल्म में उन्हें एक्टिंग का मौका टीवी कमेंट्री की वजह से ही मिला था। इस बारे में उन्होंने कहा कि मैं अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तरह कॉमनवेल्थ गेम्स में गीता फोगट सहित भारतीय पहलवानों की कमेंट्री कर रहा था। मुझे क्या पता था कि इस आयोजन के छह साल बाद आमिर खान की रिसर्च टीम मुझसे सम्पर्क करके मुझे दंगल फिल्म में कुश्ती की कमेंट्री के लिए बुलाएगी और कमेंट्री के बजाये मुझे रेसलिंग एक्सपर्ट का ही रोल ऑफर कर दिया जाएगा।

मनोज को आज वॉयस ऑफ रेसलिंग कहा जाता है। हालांकि उन्होंने 1992 के वर्ल्ड कप क्रिकेट की लाइव समीक्षा मुम्बई से लाइव की थी। फिर आखिर क्रिकेट छोड़कर कुश्ती कमेंट्री करने की क्या वजह थी, इस बारे में उन्होंने कहा कि कुश्ती मेरा पैशन है और क्रिकेट मेरे पेशे की ज़रूरत। बेशक आज प्रो रेसलिंग लीग और एंडोर्समेंट्स की वजह से पहलवानों को पैसा मिलने लगा है लेकिन उन्होंने 80 के दशक के आखिरी पड़ाव में ही कोल्हापुर सहित महाराष्ट्र के अखाड़ों का दौरा करके कुश्ती पर बहुमूल्य जानकारियां जुटाईं और पहली पुस्तक - भारतीय मल्ल विद्या, विशेष संदर्भ महाराष्ट्र लिखी। इस किताब का विमोचन सांगली में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार ने किया और इस पुस्तक को बाद में पुरस्कृत भी किया।

इसके बाद मनोज ने तीन और किताबें कुश्ती पर लिखीं। मनोज कहते हैं कि इन्हीं सब बातों से प्रेरित होते हुए मैने रेसलिंग की टीवी कमेंट्री की ओर पहला कदम वर्ल्ड कैडेट रेसलिंग चैम्पियनशिप में रखा। दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में मुझे अपने अंकल और जाने माने कुश्ती के विशेषज्ञ डीएन जोशीजी के साथ कमेंट्री का अवसर मिला और मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। बस यहीं से मेरी टीवी कमेंट्री की यात्रा शुरू हो गई और यह सफर आज भी चल रहा है। उनका कहना है कि जब तक शरीर में जान है, वह बेहद आसान भाषा में इस तरह से कुश्ती सहित ओलिम्पिक स्पोर्ट्स का विश्लेषण टीवी कमेंट्री के ज़रिये करते रहेंगे।

Edited By: Sanjay Savern