नई दिल्ली, जागरण स्पेशल। 10 लीटर दूघ, आधा लीटर घी, भारी मात्रा में बादाम और जूस। इसके अलावा हर दिन 6 किलो चिकन खा जाए ऐसा अब कोई इंसान नहीं होगा। लेकिन, आज से करीब 80 साल पहले ये एक इंसान की दैनिक डाइट थी। इस शख्स को ‘रुस्तम-ए-जमां’ नाम से जाना जाता है। लेकिन इनका सबसे मशहूर नाम गामा पहलवान है, ‘शेर-ए-पंजाब और ‘द ग्रेट गामा’ जैसे नामों से अलंकृत किए गए थे।

22 मई 1878 में यानी आज ही की तारीख में पंजाब के अमृतसर में जन्मे गुलाम मुहम्मद कैसे गामा पहलवान बने इसकी भी एक अलग ही कहानी है। लेकिन, देश के विभाजन यानी साल 1947 के बाद गामा पहलवान भारत के नहीं बल्कि पाकिस्तान के हो गए। पिता मुहम्मद अजीज भी एक पहलवान थे, इसलिए गामा पहलवान की रग-रग में पहलवानी बसी थी।

गामा पहलवान ने शुरुआत में कुश्ती के दांव-पेच पंजाब के मशहूर ‘पहलवान माधो सिंह’ से सीखे। लेकिन, इसके बाद उनकी किस्मत बदल गई और उन्हें दतिया के महाराजा भवानी सिंह ने पहलवानी करने की सुविधायें दीं। साल 1947 से पहले तक गामा पहलवान ने भारत का नाम पूरे विश्व में ऊंचा रखा। कश्मीरी ‘बट’ परिवार से नाता रखने वाले गामा पहलवान के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह विश्व में एकमात्र ऐसे पहलवान हैं जिन्होंने अपने जीवन में कोई कुश्ती नहीं हारी।

5 फुट 7 इंच के औसत हाइट वाले गामा पहलवान ने उस दौर में विश्व के लगभग हर लंबे पहलवान को पटकनी दी थी। महज 19 साल की उम्र में ही गामा पहलवान ने ‘रहीमबख्श सुल्तानी वाला’ जैसे दिग्गज पहलवान को चारों खाने चित कर दिया था। अद्वितीय शक्ति, औज और फुर्ती से रहीमबख्श सुल्तानीवाला पहलवान को हराने के बाद गुलाम मुहम्मद यानी गामा पहलवान का नाम भारत ही नहीं बल्कि विश्व में तेजी से फैल गया।

विश्व दंगल में गामा पहलवान ने अमेरिका के पहलवान ‘बैंजामिन रोलर’ और विश्व विजेता पहलवान पोलैण्ड के स्टेनली जिबिस्को को भी धूल चटाई थी। विश्व विजेता पहलवान स्टेनली जिबिस्को के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह गामा पहलवान से ज्यादा वजनी थी। बावजूद इसके वो गामा पहलवान से डरते थे। बताया जाता है कि एक बार तो पोलैंड का यह दिग्गज पहलवान मैदान छोड़कर भाग खड़ा हुआ था।

द ग्रेट गामा दुनिया के सबसे महान रेसलर में से एक थे। पांच दशक से लंबे पहलवानी करियर में वे अजेय थे। हैरान करने वाली बात ये थी कि वे दिन में 5000 उठक-बैठक और 1000 से ज्यादा दंड(पुश अप) लगाते थे। बताया जाता है कि गामा पहलवान ने एक भारी भरकम पत्थर को डंबल बनाया हुआ था। जबकि 80 किलो की एक वस्तू से वे उठक-बैठक करते थे क्योंकि उस समय जिम जैसा कोई कल्चर नहीं था।

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Posted By: Vikash Gaur