विश्व चैंपियन बनने के बाद पिता को याद कर भावुक हो गईं मनीषा, कहा-कुश्ती ही मेरे लिए पहला और आखिरी विकल्प
मनीषा भनवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा, वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान ...और पढ़ें

मनीषा ने रचा इतिहास

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शेखर झा, जागरण नई दिल्ली: भारतीय महिला पहलवान मनीषा भनवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने महिलाओं के 59 किग्रा भार वर्ग के फाइनल में अमेरिका की अबीगैल नेत्ते को रोमांचक मुकाबले में हराकर यह उपलब्धि हासिल की।
वह विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बन गईं। मनीषा की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष, कड़ी मेहनत और परिवार का साथ रहा है।
पिता ने दिया अहम सबक
उन्होंने कहा कि उनके पिता ने उन्हें जिंदगी का एक महत्वपूर्ण सबक दिया था। वह कहते थे कि जिस काम को शुरू करो, उसे पूरा करके ही छोड़ना चाहिए। किसी भी काम को बीच में अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए। मनीषा ने कहा कि कुश्ती मेरे लिए पहला और आखिरी विकल्प है। इस खेल ने मुझे जीवन दिया, पहचान दी और जीने का तरीका सिखाया है।
पिता के साथ अपने रिश्ते को लेकर उन्होंने कहा कि मैं उनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता सकती। मुझे लगता है कि वह मेरे अंदर ही हैं और हमेशा मुझसे बात करते रहते हैं। मैं हर दिन उन्हें याद करके रोती हूं। वह हमेशा मेरे दिल में रहते हैं। मेरी सफलता में परिवार और कोच का भी बहुत बड़ा योगदान है।
एशियन गेम्स में नहीं मिली थी सफलता
उन्होंने अपनी जीत को लेकर कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि वह विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतेंगी। मनीषा के लिए यह प्रतियोगिता बेहद अहम थी, क्योंकि एशियन गेम्स में वह पदक हासिल नहीं कर पाई थीं। उन्होंने कहा, मुझे भरोसा था कि मैं यहां पदक जीतूंगी। मेरे लिए इस चैंपियनशिप में पदक जीतना बहुत जरूरी था। एशियन गेम्स में पदक नहीं जीत पाने के बाद यह मेरे लिए सबसे अहम लक्ष्य बन गया था।
फाइनल मुकाबले में मनीषा शुरुआत में अमेरिकी पहलवान से पिछड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखते हुए शानदार वापसी की और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अपनी रणनीति और तैयारी के बारे में उन्होंने बताया कि अलग-अलग भार वर्गों के पहलवानों के साथ अभ्यास करने से उन्हें काफी फायदा मिला। उन्होंने कहा कि अभ्यास के दौरान अलग-अलग भार वर्गों के पहलवानों के साथ मुकाबले होते हैं।
वह चार अलग-अलग भार वर्गों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इस अनुभव ने उन्हें फाइनल में वापसी करने में मदद की। उन्होंने कहा कि वह खुद को भाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें चार भार वर्गों में देश के लिए खेलने और पदक जीतने का अवसर मिला।
ओलपिक की तैयारी पर भी नजर
मनीषा की नजर अब 2028 लास एंजिलिस ओलंपिक पर है। इसको लेकर मनीषा ने कहा कि जब मैंने स्वर्ण पदक जीता, उसके बाद शाम को कोच और पूरी टीम बैठी थीं। हमने आगे की योजना पर चर्चा की। अब सीनियर नेशनल, फिर प्रो रेसलिंग लीग होगी। इसके बाद जब भारतीय कैंप शुरू होगा, तब हम वहां से तैयारी शुरू करेंगे। पूरी टीम मिलकर तय करेगी कि कौन-सी प्रतियोगिता खेलनी है और किसमें नहीं खेलना है। यह सब कोच तय करेंगे।
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