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    Tokyo Olympics: भारतीय पुरुष बॉक्सर अमित पंघाल भी ला सकते हैं पदक- विजेंदर सिंह

    By Sanjay SavernEdited By:
    Updated: Fri, 30 Jul 2021 07:30 PM (IST)

    विजेंदर सिंह ने कहा कि जिस तरह लवलीना ने अपने कद का इस्तेमाल करते हुए सीधे पंच लगाए उसने मुझे याद दिला दिया कि मैं भी रिंग में इसी चीज को प्राथमिकता देता हूं। मुझे उम्मीद है कि अमित पंघाल भी भारत को पदक दिला सकते हैं।

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    भारतीय पुरुष बॉक्सर अमित पंघाल (एपी फोटो)

    (विजेंदर सिंह का कालम)

    लवलीना बोरगोहाई ने राष्ट्रीय मुक्केबाजी दल और पूरे देश को एक बड़ा लम्हा दिया। सभी की तरह मैं भी इस बात से बेहद खुश और गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि उन्होंने ये कर दिखाया। कुछ दिन पहले मैंने यही बात कही भी थी कि मैं उनसे पदक दौर में पहुंचने की उम्मीद कर रहा हूं क्योंकि वह एक शानदार खिलाड़ी हैं। जिस तरह उन्होंने शुरुआती स्तर में नियेन चिन चेन के खिलाफ सीधे पंचों का इस्तेमाल किया वह देखकर मुझे काफी खुशी हुई। उन्होंने शुरुआत से ही मुकाबले पर दबदबा बना लिया और चीनी ताइपे की मुक्केबाज को अपने जैब्स और सीधे पंचों से पीछे धकेले रखा। रिंग में उनका चतुराई भरा खेल पूरे चरम पर था।

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    मुझे कहना ही होगा कि जिस तरह लवलीना ने अपने कद का इस्तेमाल करते हुए सीधे पंच लगाए उसने मुझे याद दिला दिया कि मैं भी रिंग में इसी चीज को प्राथमिकता देता हूं। जिस तरह उन्होंने अपना खेल खेला, उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रहा जा सकता। लवलीना ने विरोधी मुक्केबाज को ये अहसास तक नहीं होने दिया कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है। फाइट के दौरान उनके चेहरे पर बेहद कम भाव नजर आ रहे थे। अगर चीनी ताइपे की मुक्केबाज पंच का अनुमान लगाने की उम्मीद में लवलीना का चेहरा देख रही थी कि तो उसे बस इंतजार ही करना पड़ा।

    इस फाइट में ये भी देखने को मिला कि लवलीना अपने सबक तेजी से सीखती हैं। जर्मनी का नादिन एपेट्ज के खिलाफ अपने प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले की तुलना में इस मुकाबले में उन्होंने अपने पंच लगाने में जल्दबाजी नहीं दिखाई और अच्छी रक्षात्मक शैली का भी प्रदर्शन किया। मुझे उम्मीद है कि अब उन्हें सेमीफाइनल मुकाबले से पहले अच्छा खासा और जरूरी आराम मिल जाएगा। सेमीफाइनल में उन्हें तुर्की की बुसेनाज सुरमेनेली से भिड़ना है जो 2019 की विश्व चैंपियन हैं। ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि वो कोच और फिजियो लवलीना को किस तरह तैयार करते हैं ताकि वह फाइनल तक का सफर तय कर सकें। जब कोई एथलीट बड़े पदक की ओर बढ़ता है तो कोचिंग स्टाफ उसे दबाव से निपटने में मदद कर सकता है। वहीं फिजियो इस बारे में मददगार साबित हो सकता है कि उनका शरीर दो मुकाबलों के बाद भी सही अवस्था में रहे।

    ओलिंपिक खेलों में मुक्केबाजी में देश का पहला पदकधारी होने के नाते मैं इस छोटे से क्लब में लवलीना का स्वागत करके बहुत खुश हूं, जिसका हिस्सा महान मेरी कोम भी हैं। मुझे उम्मीद है कि टोक्यो में एक और मुक्केबाज इस क्लब का हिस्सा बन सकता है। ऐसा हुआ तो ये क्लब 2012 लंदन ओलिंपिक में मेरी कोम के जीते गए कांस्य पदक के बाद से दोगुना हो सकता है। इस क्लब में एक और मुक्केबाज जो शामिल हो सकता है मेरे हिसाब से वह अमित पंघाल हैं। मुझे कहना ही होगा कि अगर पूजा रानी 75 किग्रा भारवर्ग के क्वार्टर फाइनल में चीन की लि कियान के खिलाफ जीत दर्ज करने में सफल रहती हैं तो ये काफी शानदार होगा। उन्हें 2018 की विश्व चैंपियन और रियो खेलों की कांस्य पदक विजेता के खिलाफ जीत का विश्वास लेकर रिंग में उतरना होगा। एक करीबी मुकाबले में कोलंबिया की वेलेंसिया के खिलाफ मेरी कोम की हार काफी चौंकाने वाली रही मगर बिना वक्त गंवाए रिव्यू के लिए मांग की जानी चाहिए थी। बहरहाल टोक्यो से शुरुआती दौर में मिली इस हार से मेरी का दर्जा बिल्कुल भी कम नहीं हो जाता।