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    1982 एशियन गेम्स के लिए भारत को मिली थी मेजबानी

    By Sanjay SavernEdited By:
    Updated: Sat, 11 Aug 2018 07:30 PM (IST)

    एशियन गेम्स की शुरुआत के बाद भारत को 1982 में फिर मेजबानी मिली।

    1982 एशियन गेम्स के लिए भारत को मिली थी मेजबानी

    1982 एशियन गेम्स

    एशियन गेम्स की शुरुआत के बाद भारत को 1982 में फिर मेजबानी मिली। यह उसका अपने घर में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। 1982 में कुश्ती में महाबली सतपाल ने देश को स्वर्ण दिलाया तो पीटी ऊषा ने पहली पार एशियन गेम्स में शिरकत की। यह नौवां सत्र 19 नवंबर से चार दिसंबर तक चला था जिसमें 33 देशों के 4595 खिलाडि़यों ने शिरकत की थी।

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    इस बार 13 स्वर्ण : इस बार टूर्नामेंट की मेजबानी भारत कर रहा था और दिल्ली में इसका आयोजन किया गया। अपने घर में भारत ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इस बार भारत की झोली में 13 स्वर्ण, 19 रजत और 25 कांस्य पदक आए थे। भारत तालिका में कुल 57 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर रहा। चीन ने जापान को पीछे छोड़ते हुए 61 स्वर्ण समेत 153 पदकों पर कब्जा जमाया।

    सतपाल व ऊषा आए और पदक लाए : इस गेम्स में पहली बार पीटी ऊषा ने हिस्सा लिया और 100 मीटर और 200 मीटर की रेस में रजत पदक जीता। वहीं महाबली सतपाल ने मंगोलिया के पहलवान को हराकर 100 किग्रा में देश को स्वर्ण पदक दिलाया था।

    1986 एशियन गेम्स

    जब भारत को मिली उड़न परी

    1986 एशियन गेम्स भारत के नजरिये से देखा जाए तो पीटी ऊषा के लिए याद किया जाता है। ऊषा ने इन खेलों में गोल्डन चौका लगाते हुए भारत को पांचवां स्थान दिलाया था। इन गेम्स से भारत को उड़न परी मिल गई थी। इन गेम्स में ऊषा का बोलबाला रहा था और सभी ने उनकी काबीलियत को जाना था।

    चार स्वर्ण ऊषा के नाम : अपना दूसरा एशियन गेम्स खेल रही पीटी ऊषा 1982 में 100 और 200 मीटर में रजत पदक जीत पाई थी लेकिन उन्होंने 1986 गेम्स में अपने स्वर्ण का सूखा खत्म किया। ऊषा ने इन गेम्स में 200 मीटर, 400 मीटर, 400 मीटर बाधा दौड़ और 4 गुणा 400 मीटर रिले में स्वर्ण जीते जबकि 100 मीटर में रजत पदक अपने नाम कियाा था। ऊषा के कारण ही भारत पांचवें स्थान पर रहा था।

    आतंकवादी हमला लेकिन गेम्स शुरू : सियोल में गेम्स शुरू होने में कुछ ही दिन बचे थे, लेकिन इसी दौरान गेम्स को रोकने के मकसद से आतंकवादियों ने गिंपो अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हमला कर दिया था। इस हमले में पांच लोग मारे गए थे लेकिन इसके बाद भी दक्षिण कोरिया ने हिम्मत नहीं हारी और यह गेम्स तय समय पर आयोजित कराए।

     रोचक जानकारी -

    - भारत ने पहली बार घुड़सवारी, गोल्फ और महिला हॉकी में स्वर्ण पर कब्जा जमाया था।

    - हैंडबॉल, घुड़सवारी, रोइंग, महिला हॉकी और गोल्फ को पहली बार 1982 के सत्र में शामिल किया गया जबकि फेंसिंग और बॉलिंग को बाहर कर दिया गया। भविष्य को देखते हुए 1986 गेम्स में जूडो और ताइकवांडो खेलों को अंतिम समय में शामिल किया।

    इन्हें भी जानें :

    जिम्नास्टिक्स : जिम्नास्टिक्स एक ऐसा खेल है जिसमें संतुलन, शक्ति और नियंत्रण आदि की आवश्यकता होती है। इसमें एक जिम्नास्ट को मजबूत शरीर की जरूरत होती है। महिलाओं के लिए कलात्मक जिम्नास्ट है जिसमें वॉल्ट, अनइवन बार्स, बैलेंस बीम, फ्लोर स्पर्धाएं होती है जबकि पुरुषों के लिए कलात्मक में फ्लोर, पोम्मेल हॉर्स, स्टील रिंग, वॉल्ट, पैरेलल बार्स, हॉरिजेंटल बार आदि स्पर्धाएं हैं। इसके अलावा रिदमिक और एक्रोबेटिक जिम्नास्टिक्स भी शामिल है। भारत इस खेल में अभी तक सिर्फ एक पदक जीत पाया है और इस कांस्य पदक के साथ भारत तालिका में सबसे नीचे 12वें स्थान पर है।

    हैंडबॉल : इस खेल में दो टीमें होती है जो एक-दूसरे से अपने हाथ से गेंद को एक-दूसरे के पाले में फेंकती और जो टीम गेंद को दूसरी तरफ नहीं दे पाई तो अंक गेंद फेंकने वाली टीम को मिल जाता है। 1982 में पहली बार हैंडबॉल को एशियन गेम्स में शामिल किया गया था और अभी तक भारत का इस खेल में प्रदर्शन खराब ही रहा है। भारत को हैंडबॉल में अपने पहले पदक का इंतजार है। हालात यह है कि एशियन गेम्स में हैंडबॉल की ऑलओवर पदक तालिका में शीर्ष-9 में 11 देशों को जगह मिली हुई है लेकिन भारत इसमें शामिल नहीं है। जबकि नौवें स्थान पर संयुक्त रूप से तीन देश शामिल है।

    जेट स्की : जेट स्की पहली बार एशियन गेम्स में पदार्पण करने जा रहा है। यह एक तरह का पानी का खेल है जिसमें एक ड्राइवर जेट स्की को चलाता है।

    जूडो : भारत जूडो में एशियन गेम्स में पांच पदक जीत चुका है जिसमें पांचों पदक कांस्य हैं। महिलाओं में पूनम चोपड़ा ने कांस्य जीता। वहीं, पुरुषों में बनू सिंह, श्याम सिंह गुर्जर, कावास बिलमोरिया और संदीप बयाला ने कांस्य पदक अपने नाम किए।