गुलाब के पौधे पर खिला मंदार का फूल
प्रकृति का खेल निराला है। कहीं धूप तो कहीं छांव है। ऐसी बातें ह
संवाद सूत्र, राजगांगपुर: प्रकृति का खेल निराला है। कहीं धूप तो कहीं छांव है। ऐसी बातें हमें आए दिन देखने सुनने को मिलती है तो कौतूलह नहीं होता। लेकिन जब प्रकृति में कुछ अजूबा होता है जतो जानने देखने का भाव जरूर पैदा हो जाता है। ठीक ऐसा ही दृश्य सीमेंटनगरी राजगांगपुर के आइटी कॉलोनी में इन दिनों देखने को मिल रहा है। दरअसल, कॉलोनी के एक आवास में लगे गुलाब के पौधे पर मंदार (अड़हुल ) फूल खिला हुआ है। यह स्थानीय लोगों में कौतूहल का विषय बन गया है।
यह फूल कॉलोनी के शशिभूषण चौरसिया के आंगन में खिला है। इसे देखने यहां लोगों की भीड़ जुट रही है। इस संबंध में चौरसिया का कहना है कि उन्होंने तीन साल पहले यह गुलाब का पौधा अपने आंगन में लगाया था। तभी से इसमें गुलाब का फूल खिलता रहा है। लेकिन नवरात्रि के दिन से गुलाब की कली से मंदार का फूल निकल रहा है। इसका पता चलने से यहां पर यह फूल देखने लोगों की भीड़ जुट रही है। जिसमें कोई इसे चमत्कार बता रहा है तो कोई आस्था से जोड़कर देख रहा है। इस मंदार फूल की विशेषता है कि आम तौर पर मंदार का फूल एक दिन के बाद मुरझा जाता है। लेकिन यह फूल पांच दिनों बाद मुरझाया। इस पौधे में मंदार के ऐसे तीन फूल खिले हैं। वहीं इस पौधे पर गुलाब की कली से मंदार का फूल निकलने के बाद पुन: अब गुलाब के फूल निकल रहे हैं।
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मंदार तथा गुलाब फूल का परिवार अलग होता है। मंदार मालवेसी परिवार का है और गुलाब रोजासी फैमिली का है ये दोनों अलग अलग प्रजाति के हैं। मैंने ऐसा न कभी सुना है और न ही कहीं पढ़ा है। जिससे यह शोध का विषय है।
- सुधांशु शेखर गुरु, पूर्व प्राध्यापक, डालमिया कॉलेज।
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