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    Odisha: परिवार ने नहीं ली सुध, डाक्टर ने दी मुखाग्नि

    Odisha डाक्टर ने हास्पिटल में मृत एक महिला मरीज को मुखाग्नि देने जैसा नेक कार्य किया है। मृत महिला का परिवार सोनपुर जिला के बीरमहराजपुर में रहता है लेकिन मौत की खबर दिए जाने के तीन दिन बाद भी जब कोई सदस्य शव लेने नहीं आया।

    By Sachin Kumar MishraEdited By: Updated: Wed, 01 Sep 2021 10:42 PM (IST)
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    परिवार ने नहीं ली सुध, डाक्टर ने दी मुखाग्नि। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, संबलपुर। कोरोना संक्रमण काल में संक्रमित मरीज को अपनी कार से बैठाकर बुर्ला कोविड हास्पिटल में भर्ती कराने, अपनी जुड़वां बेटियों के जन्मदिन समारोह के लिए जमा रुपये एक गरीब छात्र को पढ़ने के लिए प्रदान करने समेत गरीब मरीजों के इलाज के लिए एक रुपये वाला क्लीनिक शुरू कर चर्चा में आए बुर्ला स्थित मेडिकल हास्पिटल के डा. शंकर रामचंदानी फिर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने हास्पिटल में मृत एक महिला मरीज को मुखाग्नि देने जैसा नेक कार्य किया है। मृत महिला का परिवार सोनपुर जिला के बीरमहराजपुर में रहता है, लेकिन मौत की खबर दिए जाने के तीन दिन बाद भी जब कोई सदस्य शव लेने नहीं आया तो बुर्ला थाना पुलिस से अनुमति लेकर डा. रामचंदानी ने मंगलवार की शाम महिला का अंतिम संस्कार किया।

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    यह महिला 12 जुलाई 2018 से बुर्ला हास्पिटल में भर्ती थीं। उसे मेडिसीन वार्ड में रखा गया था। महिला को हास्पिटल में भर्ती कराने के कुछ दिन बाद से ही परिवार वाले गायब हो गए। ऐसे में असहाय महिला का इलाज करने वाले डा. रामचंदानी समेत वार्ड के स्टॉफ और नर्सों ने परिवार के सदस्यों की तरह उनकी खूब सेवा की। हास्पिटल में महिला को भले ही सरकार की तरफ से खाना-पीना और दवा मिलती थी, लेकिन पर्व-त्योहार में हास्पिटल के डाक्टर, स्टाफ और नर्स आदि मिलकर उसे नए कपड़े और मिठाई आदि देते थे। महिला की मौत बीते 28 अगस्त को 62 वर्ष की आयु में हो गई। हास्पिटल के डाक्टर, स्टाफ और बुर्ला थाना पुलिस ने परिवारवालों को सूचित किया, लेकिन 31 अगस्त तक जब कोई उनका शव लेने नहीं आया तो इलाज कर रहे डा. रामचंदानी ने बुर्ला के श्मशान में उसका अंतिम संस्कार करते हुए मुखाग्नि दी। कुछ वर्ष पहले बरगढ़ जिला के एक स्वास्थ्य केंद्र में उपेक्षित एक मरीज को अपने साथ लाकर बुर्ला हास्पिटल में भर्ती कराकर उसकी जान बचाई थी। रामचंदानी के इस सामाजिक कार्य को देखते हुए उन्हें गरीबों का मसीहा भी कहा जाने लगा है। बुद्धिजीवियों ने भी रामचंदानी के इन कार्य की सराहना करते हुए अन्य डाक्टरों से भी ऐसी सेवा करने का आह्वान किया था।