जागरण संवाददाता, राउरकेला : सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) द्वारा 24 जनवरी को सेल गौरव दिवस के रूप मे, इस्पात स्टेडियम में कोविड-19 दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए मनाया गया। कार्यपालक निदेशक (खान) एके कुंडू ने इस अवसर पर सेल का झंडा फहराया। इसके बाद सेल गान गाया गया। कार्यपालक निदेशक (खान) ने समारोह में आसमान में रंग-बिरंगे गुब्बारे भी छोड़े और स्वास्थ्य एवं फिटनेस की शपथ दिलाई।

उन्होंने कार्यपालक निदेशक (संकार्य) एसआर सूर्यवंशी, कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) एके प्रधान, कार्यपालक निदेशक (कार्मिक एवं प्रशासन) पीके सत्पति, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (सामग्री प्रबंधन एवं विपणन) सीआर महापात्र, मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (स्वास्थ्य एवं चिकित्सा) डा. बीके होता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी के साथ शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए स्टेडियम के चक्कर लगाए।

उल्लेखनीय है कि, सेल स्थापना दिवस को सेल गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है ताकि कर्मचारियों, पूर्व कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों के बीच गर्व की भावना को फिर से जगाया जा सके। मौजूदा कोविड स्थिति को देखते हुए इस वर्ष के समारोहों पर रोक लगा दी गई है। वरिष्ठ तकनीशियन (सीआरएम) अनिल मलिक ने कार्यक्रम का समन्वयन किया।

बीके राउत, महाप्रबंधक (पीएचएंडएसडब्ल्यू) ने स्वागत अभिभाषण प्रदान किया। अनिल मलिक, वरिष्ठ तकनीशियन (सीआरएम) ने कार्यक्रम का समन्वयन किया। दोपहर में कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम का विभिन्न इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से आनलाइन प्रसारण किया गया। एक संगीत कार्यक्रम हम हिदुस्तानी एक नाटक मेरा सेल मेरा गौरव प्रतिष्ठित गीत रंगबती की धुन पर नृत्य और ओडिसी, पाला और दासकठिया के मिश्रण में प्रस्तुत एक नृत्य नाटक इस्पात कथा सरिता इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण थे।

उल्लेखनीय है कि सेल स्थापना दिवस को सेल गौरव दिवस के रूप में पूरे सेल में मनाया जा रहा है ताकि कर्मचारियों, पूर्व कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों के बीच गर्व की भावना को फिर से जगाया जा सके। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की स्थापना 24 जनवरी, 1973 को हुआ था। भारत में सबसे बड़ी स्टील बनाने वाली कंपनियों में से एक और देश के केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के महारत्नों में से एक, सेल भिलाई, बोकारो, दुर्गापुर, राउरकेला और बर्नपुर में पांच एकीकृत संयंत्रों और भद्रावती, सलेम और दुर्गापुर में तीन विशेष इस्पात संयंत्रों में इस्पात उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला का उत्पादन करता है। कंपनी को लौह अयस्क का भारत का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक होने और देश का दूसरा सबसे बड़ा खान नेटवर्क होने का गौरव भी प्राप्त है। अपनी स्थापना के बाद से, सेल देश के औद्योगिक विकास के लिए एक मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इसके अलावा, इसने तकनीकी और प्रबंधकीय विशेषज्ञता के विकास में अत्यधिक योगदान दिया है। इसने उपभोक्ता उद्योग के लिए लगातार इनपुट प्रदान करके आर्थिक विकास की द्वितीय और तृतीय लहरों को ट्रिगर किया है।

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