अब भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए लगेगा टिकट
Ticket System in jagannath puri temple. भगवान जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन ने दर्शन के लिए अब टिकट व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
पुरी, जेएनएन। भगवान जगन्नाथ मंदिर में दर्शन के लिए पंक्ति व्यवस्था लागू करने के बाद अब मंदिर प्रबंधन ने दर्शन के लिए टिकट व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय सोमवार को श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति की बैठक में लिया गया। इसकी अध्यक्षता पुरी के राजा गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव ने की। इसे लागू करने के लिए मंदिर के मुख्य प्रशासक के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया गया है। जिसमें पुरी के जिलाधिकारी, पुरी के आरक्षी अधीक्षक, सेंट्रल रेंज के आरक्षी महानिरीक्षक और मंदिर प्रबंधन समिति के कुछ सदस्यों को शामिल किया गया है। यह जानकारी मंगलवार को मंदिर के मुख्य प्रशासक प्रदीप्तो महापात्र ने दी।
टिकट लेकर भीतरकाठ से दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु
टिकट लेने वाले श्रद्धालु भीतरकाठ से दर्शन कर सकेंगे। दरअसल मंदिर के गर्भगृह के द्वार के करीब बाहरी हिस्से में लकड़ी से घेरा बना हुआ है, जिसे भीतरकाठ कहा जाता है। फिलहाल सुबह में आरती के बाद एक घंटे तक श्रद्धालु भीतरकाठ से दर्शन करते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद टिकट लेकर ही लोग भीतरकाठ तक जा सकेंगे।
साठ फीसद टिकट की होगी ऑनलाइन बिक्री
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक प्रदीप्तो महापात्र ने बताया कि साठ प्रतिशत टिकट की ऑनलाइन बुकिंग होगी, जबकि पैंतीस प्रतिशत टिकट की बिक्री काउंटर से होगी। पांच प्रतिशत टिकट मुख्य प्रशासक के पास संरक्षित रहेगा, जिसका उपयोग विशेष परिस्थिति में होगा।
दूर से दर्शन के लिए नहीं लगेगा पैसा
मंदिर के अंदर भीतरकाठ से लगभग तीस फीट की दूरी पर तय स्थान से लोग मुफ्त में लाइन लगकर दर्शन कर सकेंगे। फिलहाल आरती के बाद एक घंटे बाद इसी स्थान से श्रद्धालु दर्शन करते हैं, जो व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी।
मंदिर का सोना बैंक में रखा जाएगा
मंदिर को दान में मिला सोना बैंक में गोल्ड मॉनीटाइजेशन स्कीम के तहत 2.5 फीसद ब्याज पर रखा जाएगा। इससे मंदिर के कोष में जमा सोने से भी आमदनी हो सकेगी।
मंदिर का निर्माण और इतिहास
गंग वंश के हाल ही में मिले ताम्र पत्रों से यह पता चलता है, कि वर्तमान मंदिर के निर्माण कार्य को कलिंग राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने आरम्भ कराया था। मंदिर के जगमोहन और विमान भाग इनके शासन काल 1078 - 1148 के दौरान बने थे। फिर सन 1197 में जाकर ओडिया शासक अनंग भीम देव ने इस मंदिर को वर्तमान रूप दिया था। मंदिर में जगन्नाथ अर्चना सन 1558 तक होती रही।
चार लाख वर्गफुट में फैला है मंदिर
मंदिर 400,000 वर्ग फुट में फैला है और चहारदीवारी से घिरा है। श्री जगननाथ का मुख्य मंदिर वक्ररेखीय आकार का है, जिसके शिखर पर विष्णु का श्री सुदर्शन चक्र, आठ आरों का चक्र लगा है। इसे नीलचक्र भी कहते हैं। यह अष्टधातु से निर्मित है। मंदिर का मुख्य ढाचा एक 214 फीट ऊंचे पत्थर के चबूतरे पर बना है। इसके भीतर आतरिक गर्भगृह में मुख्य देवताओं की मूर्तिया स्थापित हैं। यह भाग इसे घेरे हुए अन्य भागों की अपेक्षा अधिक प्रभाव वाला है। इससे लगे घेरदार मंदिर की पिरामिडाकार छत और लगे हुए मण्डप, अट्टालिकारूपी मुख्य मंदिर के निकट होते हुए ऊंचे होते गये हैं। मंदिर की मुख्य मढ़ी यानि भवन एक 20 फीट ऊंची दीवार से घिरा हुआ है तथा दूसरी दीवार मुख्य मंदिर को घेरती है। एक भव्य सोलह किनारों वाला एकाश्म स्तंभ, मुख्य द्वार के ठीक सामने स्थित है। इसका द्वार दो सिंहों द्वारा रक्षित है।
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