अमेरिकी टैरिफ से ओडिशा के झींगा व्यवसाय पर संकट, उद्योगपति ने PM मोदी को पत्र लिखकर लगाई गुहार
अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 50% शुल्क के कारण भारत का झींगा निर्यात उद्योग संकट में है जिससे 15 लाख लोगों की आजीविका खतरे में है। ओडिशा जिसने 2024-25 में 4700 करोड़ रुपये का झींगा निर्यात किया बुरी तरह प्रभावित है। उद्योगपति तारारंजन पटनायक ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने और झींगा को सरकारी खरीद कार्यक्रमों में शामिल करने का आग्रह किया है।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद देश की झींगा (सीफूड) निर्यात उद्योग संकट में पड़ गया है। इस उद्योग से जुड़ी करीब 15 लाख लोगों की आजीविका अब संकट में है। ओड़िशा राज्य भी इस मामले से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024-25 में ओड़िशा ने 4,700 करोड़ रुपये के झींगा निर्यात किए थे। इसमें से लगभग एक तिहाई सिर्फ अमेरिका को ही भेजा गया था। अचानक आए इस संकट ने निर्यातकों और मछुआरों के साथ-साथ सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
इस स्थिति में फाल्कन मरीन एक्सपोर्ट्स के अध्यक्ष और वरिष्ठ उद्योगपति तारारंजन पटनायक ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने कहा है कि अमेरिका के शुल्कजनित प्रभाव से झींगा उद्योग और मछुआरों की आजीविका को सुरक्षित करने के लिए तात्कालिक कदम उठाए जाएं।
पटनायक ने दिए ये सुझाव
पटनायक ने सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि सरकारी खरीद कार्यक्रमों में झींगा को शामिल किया जाए। पत्र में उन्होंने यह सुझाव दिया है कि थलसेना, अर्धसैनिक बल, अन्य सरकारी पोषण योजनाओं और कल्याणकारी वितरण कार्यक्रमों में झींगा को शामिल किया जाए। इससे देश में झींगा की मांग बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भरता कम होगी।
उद्योगपति पटनायक ने कहा कि झींगा स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इसमें प्रोटीन प्रचुर मात्रा में, कम वसा, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन B12, सेलेनियम और आयोडीन जैसे पोषक तत्व होते हैं। उन्होंने इस विषय में जागरूकता और प्रचार बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई।
पिछले दो दशकों में ओड़िशा का झींगा निर्यात तेजी से बढ़ा है। 2004-05 में राज्य का झींगा निर्यात 300-400 करोड़ रुपये के बीच था। 2024-25 में यह बढ़कर 4,700 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
इस दौरान अमेरिका, यूरोप, रूस, जापान और अन्य विकसित देशों को भारत से झींगा निर्यात हुआ। सालाना देश में 9 लाख टन झींगा उत्पादन होता है, जो विश्व के झींगा व्यापार का लगभग 40 प्रतिशत है।
पटनायक ने कहा कि अमेरिका बाजार में भारत का प्रतिद्वंद्वी इक्वाडोर है, जिस पर अमेरिका ने 10% शुल्क लगाया है। इससे भारतीय झींगा वहां प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएगा।
शुल्कजनित नुकसान की भरपाई के लिए वैकल्पिक बाजार तलाशना होगा। ऐसे समय में सरकार की सहायता ही उद्योगपतियों और मछुआरों के लिए एकमात्र भरोसा है।
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