भुवनेश्वर, जागरण संवाददाता। देश के दूसरे सबसे बडे जैव-विविधता वाले संरक्षित जंगल सिमलीपाल में लगी आग को काबू में करने के लिए सैकडों वन विभाग तथा अग्निशमन कर्मचारी लगातार कोशिश में लगे हुए हैं। सिमलीपाल के विभिन्न स्थानों पर आग लगे होने की खबर है। सेटेलाइट से मिली ईमेज के अनुसार सिमलीपाल संरक्षित जंगल के 13 स्थानों पर आग लगी है। आग की लपटें और अधिक क्षेत्र में न पहूंचे इसके लिए वन विभाग के 850 कर्मचारी सहित 1 हजार से ज्यादा लोग आग बुझाने के काम में लगाए गये हैं। वन विभाग के अनुसार  सिमलीपाल में ग्रीष्म ऋतु में आग लगती ही रहती है। इस बार आग का प्रकोप ज्यादा क्षेत्र में फैला हुआ है। उधर नीलगिरि इलाके के तिनिकोणिआ जंगल में लगी आग पर काबू पा लिया गया है।

 गौरतलब है कि ग्रीष्म ऋतु में प्रदेश के विभिन्न जंगलों में आग लगना आम बात है लेकिन सिमलीपाल जंगल सहित ब्रह्मपुर ,बालेश्वर जिले में जंगलों में लगी आग की खबर राज्य सरकार ने केन्द्रीय वन संपदा मंत्री के रिपोर्ट मांगने के बाद दी लगती है। सिमलीपाल  जंगल में आग लग कर कई ईलाके में फैलने की बात केन्द्रीय मंत्री को ट्वीट करके बताए जाने के बाद राज्य वन विभाग की नींद खुली। 

मुख्यमंत्री सहित पुरा अमला हरकत में आ गया और प्रधानमुख्य वनपाल तक को घटनास्थल पहूंचना पड़ गया। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सिमलीपाल संरक्षित जंगल में लगी भीषण आग पर चिंता जताते हुए इसकी सुरक्षा के लिए अधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी है। सीएम ने कहा कि सिमलीपाल संरक्षित जंगल केवल ओडिशा राज्य या भारत की ही नहीं अपितु समग्र विश्व की अनमोल संपदा है। जैव-विविधता से भरे इससंरक्षित जंगल को बचाना हम सभी का उत्तरदायित्व है। जंगल व परिवेश विभाग की सचिव मोना शर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि सिमलीपाल में आग नियंत्रण में है। 

आग बुझाने के लिए लगातार प्रयास जारी है। उन्होंने कहा कि आग लगने की घटना से किसी जंगली जानवर के मारे जाने की खबर नहीं है। साथ ही संरक्षित जंगल के बड़े पेड़ों को भी ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। सेटेलाइट से मिली जानकारी के अनुसार केवल सिमलीपाल ही नहीं अपितु राज्य के तकरीबन 60 जंगलों में आग लगी हुई है। वन विभाग इसे सामान्य घटना मान कर चल रहा है। विभाग के अनुसार जंगलों में इस तरह की आग गर्मी के समय लगती ही है।

 

Edited By: Babita Kashyap