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Puri Jagannath Mandir के बाहरी रत्न भंडार की गिनती पूरी, अब सोमवार को खुलेगा रहस्यमयी खजाना

Published: Sat, 11 Apr 2026 10:46 AM (GMT+05:30)

पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखे आभूषणों की गिनती और मूल्यांकन का कार्य महत्वपूर्ण चरण में है। बाहरी ...और पढ़ें

पुरी जगन्नाथ मंदिर। फाइल फोटो

पुरी जगन्नाथ मंदिर। फाइल फोटो

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शेषनाथ राय, भुवनेश्वर। पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर (Puri Jagannath Temple) के बहुप्रतीक्षित रत्न भंडार में रखे महाप्रभु के बहुमूल्य आभूषणों की गिनती, मरम्मत और मूल्यांकन का कार्य अब अहम चरण में पहुंच गया है।

मंदिर प्रशासन ने बाहरी रत्न भंडार (आउटर ट्रेजरी) में रखे आभूषणों की गिनती और मरम्मत प्रक्रिया पूरी कर ली है, जबकि आंतरिक रत्न भंडार (इनर ट्रेजरी) का कार्य सोमवार से शुरू होगा।

मंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने जानकारी दी कि बाहरी रत्न भंडार में रखे सभी आभूषणों का लेखा-जोखा तैयार कर लिया गया है।

इस बार पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए हाईटेक तकनीक का सहारा लिया गया है। हर आभूषण की 3डी मैपिंग, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो सके।

अब सबकी निगाहें आंतरिक रत्न भंडार पर टिकी हैं, जहां 13 अप्रैल से गिनती और मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि 14 अप्रैल को महा विषुव संक्रांति के कारण कार्य एक दिन के लिए स्थगित रहेगा। इसके बाद 16 से 18 अप्रैल तक लगातार यह प्रक्रिया जारी रखी जाएगी।

मंदिर में कीमती आभूषणों का खजाना 

गौरतलब है कि श्री जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार सदियों से आस्था और रहस्य का केंद्र रहा है। मंदिर परिसर के इस सबसे सुरक्षित और पवित्र हिस्से में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के बहुमूल्य आभूषण सुरक्षित रखे जाते हैं।

इन आभूषणों में केवल सोने-चांदी की चमक ही नहीं, बल्कि ओडिशा की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और इतिहास की झलक भी दिखाई देती है।

इतिहासकारों के अनुसार, इन गहनों को विभिन्न कालखंडों में राजाओं, श्रद्धालुओं और दानदाताओं ने अर्पित किया था, जो आज भी राज्य की गौरवशाली विरासत के प्रतीक बने हुए हैं। यही कारण है कि जब भी रत्न भंडार की गिनती और मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू होती है, लोगों में उत्सुकता चरम पर पहुंच जाती है।

इस बार भी पूरे राज्य के साथ देशभर की नजरें इस प्रक्रिया पर टिकी हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और विशेषज्ञों की निगरानी में एक-एक आभूषण का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।

ऐसे में यह केवल एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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