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    पुरी में हविष्यालियों की भीड़ ने बढ़ाई मुश्किलें: व्यवस्था केवल 2500 के लिए, पहुंचे 4000 से अधिक श्रद्धालु

    Updated: Tue, 07 Oct 2025 10:40 AM (IST)

    कार्तिक नियम शुरू होते ही श्रीजगन्नाथ धाम पुरी में हविष्यालियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। सरकार ने 2500 हविष्यालियों के ठहरने की व्यवस्था की थी लेकिन ...और पढ़ें

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    पुरी में हविष्यालियों की भीड़ ने बढ़ाई मुश्किलें। फोटो जागरण

    जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। कार्तिक नियम की शुरुआत के साथ ही श्रीजगन्नाथ धाम पुरी में हविष्यालियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। सरकार की ओर से जहां केवल 2500 हविष्यालियों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी, वहीं संख्या 4000 के पार पहुंच गई है।

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    सूत्रों के अनुसार, कई श्रद्धालु बिना पंजीकरण के ही अलग-अलग शिविरों में पहुंच गए हैं और आश्रय देने की गुहार लगा रहे हैं। वहीं कुछ महिलाएं शिकायत कर रही हैं कि पंजीकरण कम समय में बंद होने के कारण उनका नाम सूची में शामिल नहीं हो सका।

    स्थिति यह है कि पुरी के चारों प्रमुख हविष्याली शिविरों में भारी भीड़ देखी जा रही है। बिना पंजीकृत हविष्यालियों की बढ़ती संख्या ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने देर रात आपात बैठक बुलाई और भीड़ को समायोजित करने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।

    प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अतिरिक्त टेंट लगाने और भोजन-वितरण व्यवस्था को सुचारू रखने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

    श्रीजगन्नाथ मंदिर में कार्तिक नियम प्रारंभ

    भगवान श्रीजगन्नाथ की नगरी पुरी में आज से कार्तिक नियम की शुरुआत हो चुकी है। यह पूरा माह भगवान विष्णु की आराधना और भक्ति का विशेष काल माना जाता है।

    श्रीजगन्नाथ मंदिर में इस दौरान विशेष पूजा-पाठ और नीतियों का आयोजन होगा। मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं दोनों ने इस पवित्र अवसर के लिए पूरी तैयारी कर ली है।

    हविष्याली भक्तों की भीड़

    आज से शुरू होने वाले कार्तिक व्रत के साथ ही बड़ी संख्या में हविष्याली यानी वे भक्त जो इस माह केवल सादा और सात्विक भोजन करते हैं, पुरी पहुंचने लगे हैं।

    इन भक्तों के लिए मंदिर परिसर के आसपास कई स्थानों पर रहने और भोग वितरण की विशेष व्यवस्था की गई है। पुरी नगर के हर धर्मशाला, मठ और आश्रम में भी भक्तों की चहल-पहल बढ़ गई है।

    विशेष पूजा और नीतियां होंगी आयोजित

    मंदिर प्रशासन के अनुसार, कार्तिक माह में बद्री नारायण भोग, तुलसी पूजा, हरि हरण मिलन जैसे विशेष धार्मिक अनुष्ठान प्रतिदिन किए जाएंगे। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए भी प्रतिदिन अलग-अलग भोग और वेशभूषा की व्यवस्था की गई है।

    सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

    भक्तों की भीड़ को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां मंदिर और ग्रैंड रोड क्षेत्र में तैनात की गई हैं। नगर प्रशासन ने पार्किंग, जलापूर्ति और सफाई की भी विशेष व्यवस्था की है।

    धार्मिक आस्था का चरम, देवउठनी एकादशी तक चलेगा नियम

    यह कार्तिक नियम देवउठनी एकादशी तक चलेगा, जब भगवान विष्णु योग निद्रा से जाग्रत होंगे। उस दिन मंदिर में विशेष एकादशी पूजा और महाभोग का आयोजन किया जाएगा। भक्तों का मानना है कि इस पूरे माह में किए गए नियम, व्रत और पूजा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    पुरी में इन दिनों का माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में रंगा है। मंदिर की घंटियों की ध्वनि, भक्ति गीतों की गूंज और श्रद्धालुओं की आस्था ने शहर को फिर एक बार भक्ति रस में डुबो दिया है।