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    पूर्व विधायक मोकिम का कांग्रेस से निष्कासन, ओडिशा कांग्रेस की आंतरिक कलह उजागर

    Updated: Sat, 20 Dec 2025 01:41 AM (IST)

    ओडिशा में कांग्रेस के पूर्व विधायक मोहम्मद मोकिम को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। सोनिया गांधी को लिखे गए एक आलोचनात्मक पत्र को सार्वजनिक करने क ...और पढ़ें

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    डिजिटल डेस्क, भुवनेश्वर। कांग्रेस ने ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मोकिम को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। मोकिम पर यह कार्रवाई सोनिया गांधी को लिखे गए एक आलोचनात्मक पत्र को सार्वजनिक करने के कारण झेलनी पड़ी। पार्टी नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता करार दिया है। 

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    कांग्रेस ने बीजेपी की मानसकिता और भगवा पार्टी की हितों में काम करने का आरोप लगाकर पार्टी से निष्कासित कर दिया। ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि निजी तौर पर पत्र लिखना स्वीकार्य हो सकता है, लेकिन उसे मीडिया में लाना पार्टी विरोधी कदम है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक करने से साफ जाहिर है कि वो पार्टी में नहीं रहना चाहते हैं।

    मोकिम के पत्र में कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को लेकर कड़ी आलोचना की गई थी। उन्होंने लिखा कि पार्टी देशभर में राजनीतिक, संगठनात्मक और भावनात्मक रूप से सिमट रही है। उनके अनुसार, कांग्रेस अपनी विरासत बाहरी विरोधियों से नहीं बल्कि गलत नेतृत्व और गलत फैसलों से खो रही है।

    पत्र में यह भी कहा गया कि पार्टी के बूथ और जिला स्तर के कार्यकर्ता खुद को अनदेखा महसूस कर रहे हैं, जिससे चुनावी जीत मुश्किल हो गई है। मोकिम ने दावा किया कि विधायक रहते हुए भी वे तीन साल तक राहुल गांधी से नहीं मिल पाए।

    मोकिम ने लगातार 6 चुनाव हारने के साथ हाल ही में हुए नुआपड़ा उपचुनाव में हार पर भी चिंता जाहिर की है। कांग्रेस को उपचुनाव में 83 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। खास बात यह है कि यह निर्वाचन क्षेत्र प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास के संसदीय क्षेत्र में है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई नेता अपने क्षेत्र की जनता का विश्वास नहीं जीत पाता, तो स्वाभाविक रूप से कार्यकर्ताओं का भी नेतृत्व पर से भरोसा उठ जाता है।

    गौरतलब है कि ओडिशा में कांग्रेस की स्थिति लंबे समय से कमजोर बनी हुई है। 1995 के बाद पार्टी सत्ता से बाहर है और धीरे-धीरे बीजद और फिर भाजपा के सामने हाशिए पर चली गई। उन्होंने बताया कि 2000 में कांग्रेस ने सिर्फ 26 सीटें जीतीं, 2004 में 38, 2009 में 27 और 2014 में 10 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी।

    इसके अलावा, 2019 में ओडिशा में कांग्रेस की सीटों की संख्या घटकर 9 रह गई और 2024 में यह 14 सीटें ही जीत सकती है। हाल की घटना एक बार फिर कांग्रेस के अंदर नेतृत्व और असहमति को लेकर जारी संघर्ष को उजागर करता है।

    हालांकि, नवीन पटनायक की बढ़ती उम्र के तकाजा का फायदा उठाकर कांग्रेस पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है, क्योंकि 2024 में हुए लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में बीजेडी को अभूतपूर्व हार का सामना करना पड़ा था।

    लेकिन कांग्रेस की आंतरिक कलह को देखते हुए यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि पार्टी के पास राज्य में दोबारा पैंठ बनाने के लिए कोई भी योजना नहीं है। दरअसल, कांग्रेस के साथ कई राज्यों में हुआ है कि वहां के क्षेत्रीय दलों और बीजेपी की वजह से हाशिए पर चली गई है। राष्ट्रीय नेतृत्व की तरफ से आलोचनात्मक पत्र लिखने मात्र से मोकिम को पार्टी से निष्कासित करने की कार्रवाई से पार्टी में अंसतोष के स्वर को और भी ज्यादा उजागर कर सकती है।