Kyonjhar में ड्रोन की सहायता से हाथियों के झुंड की तलाश, छह माह के बच्चे को मिलाने में वन विभाग का अभियान तेज
ओडिशा के क्योंझर जिले में वन विभाग एक छह महीने के हाथी के बच्चे को उसके झुंड से मिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। ड्रोन और विशेषज्ञ टीमों की मदद से खोज जारी है। बच्चे को सुकदला पहाड़ी के पास एक गड्ढे में पाया गया था। उसे सुरक्षित निकालकर झुंड से मिलाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन झुंड बिखर जाने के कारण कठिनाई हो रही है। बच्चे की देखभाल की जा रही है और उसे जल्द मिलाने की उम्मीद है।

हाथी के बच्चे को झुण्ड में शामिल करने के लिए बनाई गई टीम में शामिल चिकित्सक,अधिकारी और कर्मचारी। ● जागरण
दो दिन की खोज बेअसर, फिर मिला अकेला बच्चा
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चा कमजोर था और थकान से चलने में सक्षम नहीं था। टीम ने उसे दूध, गुनगुना पानी और चिकित्सीय सलाह के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया, जिससे उसकी स्थिति में सुधार हुआ।
पहली कोशिश: 12 किमी दूर मिला झुंड, पर बच्चा पहुंच नहीं पाया
शनिवार शाम वन विभाग, डब्ल्यूटीआई (वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया) और विशेष रैपिड रिस्पॉन्स टीम मिलकर एक संयुक्त दल बनाया गया ताकि बच्चे को सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से झुंड तक पहुंचाया जा सके।
ड्रोन की मदद से खोज, लेकिन झुंड बिखरा मिला
नंदनकानन के विशेषज्ञों की सलाह पर बच्चे को विशेष डिजाइन किए गए एनिमल ट्रांसपोर्ट व्हीकल में बिना किसी शारीरिक स्पर्श के झुंड के क्षेत्र में ले जाया गया। इस दौरान ड्रोन की मदद से झुंड का सटीक लोकेशन पता करने का प्रयास किया गया।
हालांकि ड्रोन सर्वे में पता चला कि हाथियों का झुंड बिखर गया है और बड़े क्षेत्र में फैल गया है। ऐसे में बच्चे को उसकी सही मातृ-समूह तक पहुंचाने में कठिनाई बढ़ गई। इस वजह से बच्चे को झुंड से मिलाने की पहली कोशिश नाकाम रही।
रविवार देर शाम शुरू हुआ दूसरा प्रयास
वन विभाग ने बताया कि बच्चा लगभग छह माह का है और उसकी देखभाल के लिए खास भोजन-पानी योजना बनाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार इस उम्र में बच्चे को जल्द से जल्द अपनी मां और झुंड से मिलाना बेहद जरूरी है ताकि उसका प्राकृतिक विकास बाधित न हो।
डीएफओ धनराज ने बताया कि रविवार देर शाम टीम ने बच्चे को झुंड से मिलाने के लिए दूसरा प्रयास शुरू कर दिया है। जंगल में कई स्थानों पर ड्रोन सर्वे, थर्मल डिटेक्शन और टीमों की तैनाती की गई है।

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