विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 03, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ओडिशा रेल हादसे के चश्मदीद केरल के किरण ने सुनाई इंसानियत की दास्तां, कैसे स्थानीय लोगों ने मसीहा बन बचाई जान

By Jagran NewsEdited By: Yashodhan Sharma
Published: Sat, 03 Jun 2023 10:19 PM (GMT+05:30)

Odisha Train Accident ओडिशा में 36 वर्षीय केरल के केएस किरण अपने तीन मित्रों के साथ शालीमार से लौट रहे ...और पढ़ें

ओडिशा रेल हादसे के चश्मदीद केरल के किरण ने सुनाई इंसानियत की दास्तां
ओडिशा रेल हादसे के चश्मदीद केरल के किरण ने सुनाई इंसानियत की दास्तां

जागरण संवाददाता, बालेश्वर। कहते हैं, जाको राखे साईंया, मार सके न कोय। 36 वर्षीय केरल के केएस किरण अपने तीन मित्रों के साथ शालीमार से लौट रहे थे।

किरण ने सुनाई आंखों देखी

किरण ने बताया कि स्लीपर कोच में भीड़ होने के कारण वे रिजर्वेशन बोगी में बैठ गए। बालेश्वर में कन्फर्म टिकट वाले पैसेंजर के आने के बाद सभी अपने बैग लेकर खड़े हो गए। अचानक हादसा हो गया।

इससे यात्री एक-दूसरे पर गिरने लगे। दो बार लुढ़कने के बाद बोगी पलटकर रुक गई। किसी तरह हम आपातकालीन निकास से बाहर निकले। टक्कर के साथ ही डिब्बे की बत्ती बुझ गई। चारों ओर कराहने, चिल्लाने की आवाज आ रही थी।

हम में से एक वैशाख के सिर में चोट लगी थी, इसलिए हम यह सुनिश्चित करने के लिए जल्दी में थे कि उसे चिकित्सा सहायता मिले। कुछ दूर पर हमें एक रोशनी दिखाई दी और हम उसकी ओर चल पड़े।

यह एक स्थानीय निवासी का घर था, जिसने हमें स्थानीय अस्पताल ले जाने के लिए एक वाहन की व्यवस्था की। हम चारों एक महीने पहले कोलकाता गए थे। त्रिशूर के एक ठेकेदार ने हमे वहां एक मंदिर के फर्श का काम सौंपा था।

वाहन मालिकों ने दिखाई उदारता

हादसे में आंशिक रूप से घायल लोग अपने घर जाने के लिए बेचैन दिख रहे थे। मगर उनके पास कोई साधन नहीं था। इस दौरान बालेश्वर और भद्रक के साथ ही अन्य जिलों के बस मालिकों और अन्य वाहन मालिकों ने उदारता दिखाई।

उन्होंने अपने खर्च पर ट्रेन यात्रियों को भुवनेश्वर और कोलकाता ले जाने की व्यवस्था की और स्वत: पहुंचे रक्तदान करने, न किसी से जान-पहचान और न ही खून का रिश्ता, लेकिन इन सबसे ऊपर इंसानियत का रिश्ता होता है। यही रिश्ता बालेश्वर में देखने को मिला।

रक्तदान के लिए आगे आए स्थानीय लोग

शुक्रवार को हुई भीषण रेल दुर्घटना में हजार से अधिक लोग घायल हो गए। सोरो, भद्रक, बालेश्वर से लेकर कटक के सभी अस्पताल घायलों से अटे पड़े हैं। इस बीच बालेश्वर ब्लड बैंक में रक्त की कमी हो गई।

जब इस बात का पता स्थानीय लोगों को चला तो लोग स्वत: ही रक्तदान करने अस्पताल पहुंच गए। हरेंद्र प्रधान बालेश्वर में रहते हैं।

उन्होंने बताया कि इंटरनेट मीडिया से पता चला कि घायलों को खून की जरूरत है। मैं अपने मित्रों के साथ रक्तदान करने पहुंच गया।

अस्पताल में कई ऐसे घायल यात्री मिले, जिनका काफी खून बह चुका था। इंटरनेट मीडिया पर लोगों से रक्तदान करने की अपील की गई। इसका असर यह हुआ कि घंटे भर के अंदर अस्पतालों में रक्तदान करने वालों की लाइन लग गई।