काठमांडू, प्रेट्र। नेपाल में मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव संसद में चर्चा के लिए सूचीबद्ध होने के बाद सेना भी सक्रिय हो गई है। उच्च सैन्य अधिकारियों ने बैठक करके हालात पर नजर होने की बात कही है।

देश के सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश सुशीला कड़की के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव सत्ता में भागीदार दो राजनीतिक दल लेकर आए हैं। प्रस्ताव पर सत्तारूढ़ नेपाली कांग्रेस और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के 294 सांसदों ने हस्ताक्षर किये हैं। मुख्य न्यायाधीश पर प्रशासनिक कार्य में दखलंदाजी करने वाला पक्षपातपूर्ण आदेश पारित करने आरोप लगाया गया है। संसद में विचार के लिए प्रस्ताव के सूचीबद्ध होते ही सुशीला कड़की नियमानुसार अपने पद से निलंबित हो गई हैं। देश के उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बिमलेंद्र निधि ने महाभियोग प्रस्ताव पर असहमति के चलते पद से इस्तीफा दे दिया है।

यह भी पढ़ें: डोनाल्‍ड ट्रंप के सलाहकार को छोड़ना पड़ेगा व्हाइट हाउस

बिमलेंद्र निधि देश की सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस के नेता हैं और उसकी तरफ से सरकार में सबसे ऊंचे पद पर प्रतिनिधित्व कर रहे थे। दूसरे उप प्रधानमंत्री व विकास मामलों के मंत्री कमल थापा ने भी महाभियोग प्रस्ताव पर अपनी नाखुशी जाहिर की है। थापा सरकार में शामिल राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के नेता हैं। कम्युनिस्ट पार्टी के नेता पुष्प दहल प्रचंड प्रधानमंत्री के रूप में सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। नेपाल पिछले कुछ समय से राजनीतिक अस्थिरता का शिकार है। यहां पर स्थानीय स्तर के चुनाव 14 मई को प्रस्तावित हैं, जो चरणबद्ध तरीके से जून तक चलने हैं। ज्यादातर मधेशी दलों ने संविधान में संशोधन के बगैर इन चुनावों का विरोध किया है।

यह भी पढ़ें: ओसामा को मारने वाले सैनिक का खुलासा, लादेन की खोपड़ी के हो गए थे टुकड़े

मधेशी दलों का राज्यों की तय की गई सीमाओं को लेकर विरोध है। इससे उनकी सत्ता में भागीदारी पर फर्क पड़ने की आशंका है। ताजा घटनाक्रम से चुनाव कार्यक्रम को लेकर असमंजस पैदा हो गया है। सेना की मीडिया विंग की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि उच्च अधिकारियों ने हालात पर नजर रखने का फैसला किया है। साथ ही सुरक्षा के इंतजाम चाक-चौबंद कर दिये गए हैं।

Posted By: Ravindra Pratap Sing