नई दिल्‍ली (स्‍पेशल डेस्‍क)। पाकिस्‍तान के पूर्व राष्‍ट्रपति और तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ को पाकिस्‍तान की आतंक रोधी अदालत ने भगोड़ा करार दिया है। यह मामला पाकिस्‍तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्‍या से जुड़ा था। पाकिस्‍तान के शायद वह पहले जनरल हैं जिन्‍हें कोर्ट ने किसी आपराधिक मामले में भगोड़ा करार दिया है। बुधवार को ही उन्‍हें एक अन्‍य मामले में हाईकोर्ट ने आरोप मुक्‍त किया था। यह मामला बहुचर्चित वरिष्‍ठ बलूच नेता नवाब अकबर खान बुग्‍ती की हत्‍या से जुड़ा था। इस मामले में जहां मुशर्रफ को कोर्ट ने बड़ी राहत दी थी वहीं इस फैसले से स्विटजरलैंड में निर्वासित जीवन व्‍यतीत कर रहे बुग्‍ती के बेटे ब्रहृमदाग बुग्‍ती को काफी निराशा हुई। मुशर्रफ ने 1999-2001 तक मुख्य कार्यकारी और 2001-2008 तक राष्ट्रपति के रूप में शासन किया था। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या मुशर्रफ अदालत का सामना करने के लिए स्वदेश वापस आएंगे। 

 

क्‍या वापस आएंगे मुशर्रफ
कोर्ट से भगोड़ा घोषित होने के बाद बड़ा सवाल यह है कि क्‍या दुबई में निर्वासित जीवन जी रहे मुशर्रफ कोर्ट का सामना करने के लिए वापस स्‍वेदश आएंगे। हालांकि रक्षा जानकार इस बात से इनकार नहीं करते हैं कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने मुशर्रफ पर काफी हद तक नकेल डालने का काम किया था। जानकार यह भी मानते हैं कि नवाज और मुशर्रफ का हमेशा से ही छत्‍तीस का आंकड़ा रहा है। लिहाजा यह कहा जा सकता है निकट भविष्‍य में उनके स्‍वदेश वापसी की संभावना काफी कम है। इसकी एक वजह यह भी है कि उनके ऊपर जितने मामले चल रहे हैं उनमें उन्‍हें मौत की सजा तक हो सकती है। 

 

मुशर्रफ की वतन वापसी के कोई आसार नहीं 
विदेश मामलों के जानकार कमर आगा ने Jagran.Com से बात करते हुए कहा कि निकट भविष्‍य में मुशर्रफ की वतन वापसी के कोई आसार नजर नहीं आते हैं। इसकी कुछ खास वजहों में यह भी है कि मौजूदा समय में सेना नहीं चाहती है कि मुशर्रफ वापस आकर किसी तरह की सक्रिय राजनीति में हिस्सा लें। दूसरी बात ये है कि सेना यह भी नहीं चाहती है कि किसी जनरल को कोर्ट से सजा का सामना करना पड़े। इससे उसकी छवि को भी नुकसान पहुंच सकता है। उनका यह भी मानना है कि निकट भविष्य में पाकिस्तान की राजनीति जिस करवट बैठती दिखाई दे रही है उसमें कट्टरपंथियों की आमद बढ़ेगी और सेक्युलर पार्टियां जो भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने को इच्छुक हैं, वह धीरे-धीरे हाशिए पर पहुंच जाएंगे। लिहाजा निकट भविष्य में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी अब एक प्रश्नचिन्ह लग गया है। आने वाले समय में वह भी हाशिये पर दिखाई देंगे।

 

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मुशर्रफ से खफा धार्मिक संस्थाएं
आगा मानते हैं कि मुशर्रफ की वापसी के आसार इसलिए भी कम हैं क्योंकि उनसे धार्मिक संस्थाएं काफी खफा हैं। इसकी वजह उनके शासन में हुआ लाल मस्जिद पर हमला है। यह संस्थाएं कभी नहीं चाहेंगी कि वह वापस आएं। इसके अलावा यदि उनकी वापसी होती भी है तो उनकी जान को खतरा भी जरूर होगा। क्योंकि मौजूदा पाकिस्तान में मुशर्रफ को चाहने वाले लोग काफी कम हैं, उन लोगों की तादाद कहीं अधिक है जो उनसे खफा हैं। इस बात से मुशर्रफ बखूबी वाकिफ हैं।

 

 

उन्होंने Jagran.Com से बात करते हुए यह भी कहा कि यदि उन्हें कोर्ट से कुछ राहत मिलती हुई दिखाई देगी तो जरूर हो सकता है कि मुशर्रफ वापसी की सोचें, लेकिन यह फिलहाल होता दिखाई नहीं दे रहा है। इसकी वजह अदालत पर कटटरपंथ का हावी होना है। यही वजह है कि आने वाले समय में पाकिस्ताान बेहद खतरनाक रूप इख्तियार कर लेगा। यह ठीक ऐसा ही होगा जैसा अभी उत्तर कोरिया है, जो कि पूरे विश्व के लिए काफी खतरनाक साबित होगा। वह बेनजीर भुट्टो से जुड़े मामले में आए कोर्ट के आदेश को भी हास्यास्पद मानते हैं। उनका कहना है कि इस मामले में कोर्ट ने उन लोगों को सजा दे दी, जिन्होंने ने उस दौरान काफी बेहतर काम किया था, जबकि पांच आतंकियों को कोर्ट ने छोड़ दिया। 

 

संपत्ति जब्‍त करने के आदेश   

बेनजीर हत्‍याकांड में अदालत ने मुशर्रफ की संपत्ति जब्त करने का भी आदेश दिया है। अदालत ने दस साल बाद दिए फैसले में दो पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए उन्‍हें 17 साल कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा इस मामले आरोपी बनाए गए पांच अन्य को कोर्ट ने बरी कर दिया है। शुरू में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के प्रमुख बैतुल्ला महसूद पर हत्या का आरोप लगा था। मुशर्रफ सरकार ने कुछ ऑपरेटरों के साथ मसूद की बातचीत के टेप जारी किए थे।

 

दुबई से ही कार्यक्रम में की थी शिरकत

हालांकि स्‍वदेश वापसी को लेकर खुद मुशर्रफ स्थिति साफ नहीं कर सके हैं। उन्‍होंने कई बार वतन वापसी की बात जरूर की है, लेकिन कानूनी शिकंजा कसने के चलते वह इससे गुरेज करते नजर आए हैं। आपको याद होगा कि इसी वर्ष 26 फरवरी में मुशर्रफ एक कार्यक्रम में दुबई से ही शिरकत करते हुए नजर आए थे। इस दौरान उन्‍होंने कई सवालों के जवाब भी दिए थे और कहा था कि वह स्‍वदेश वापस जरूर आएंगे। 

 

 

चुनावी रैली में हुई थी भुट्टो की हत्‍या

गौरतलब है कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता और दो बार प्रधानमंत्री रह चुकीं बेनजीर की हत्या 27 दिसंबर 2007 को उस वक्‍त कर दी गई थी जब वह रावलपिंडी के लियाकत बाग से एक चुनावी जनसभा को संबोधित कर वापस लौट रही थीं। आत्मघाती हमलावर ने उनकी कार के करीब जाकर खुद को विस्फोटक से उड़ा लिया था। उसके बाद ताबड़तोड़ गोलीबारी भी शुरू हो गई थी। इस हत्याकांड में भुट्टो के अलावा 22 अन्य लोगों की जान चली गई थी। 

 

दो को सजा तो पांच बरी

विशेष जज असगर खान ने मुशर्रफ को भगोड़ा और रावलपिंडी के पूर्व सीपीओ सउद अजीज व रावल टाउन के पूर्व पुलिस अधीक्षक खुर्रम शहजाद को 17-17 साल कैद की सजा सुनाई है। दोनों पर पांच-पांच लाख रुपये (पाकिस्तानी) जुर्माना भी लगाया है। दोनों पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के संदिग्ध एतजाज शाह, शेर जमान, अब्दुल राशिद, रफाकत हुसैन और हसनैन गुल को बरी कर दिया।

 

बेनजीर की पार्टी और बच्चे नाखुश 

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि अदालत का फैसला हताश करने वाला है। उन्होंने कहा कि पार्टी कानूनी विकल्पों की तलाश करेगी। पार्टी के प्रवक्ता फरहतुल्ला बाबर ने निराशा और दुख जताया। उन्होंने कहा कि न्याय नहीं हुआ।

 

विवादों के मुशर्रफ

- नवाब अकबर खान बुग्ती पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के एक राष्ट्रवादी नेता थे जो बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग एक देश बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। 2006 में बलूचिस्तान के कोहलू जिले में एक सैन्य कार्रवाई में अकबर बुगती और उनके कई सहयोगियों की हत्या कर दी गई थी। इस अभियान का आदेश जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने दिया था जो तब देश के सैन्य प्रमुख और राष्ट्रपति दोनों थे।

 

- मुशर्रफ ने पाकिस्तान में 2007 में आपातकाल लागू कर दिया।

 

- बेनजीर भुट्टो दिसंबर 2007 में रावलपिंडी में एक चुनावी रैली के बाद एक आत्मघाती हमले में मारी गई। मुशर्रफ पर उन्हें जरूरी सुरक्षा मुहैया नहीं कराने के आरोप लगे।

 

- मुशर्रफ के आदेश पर 2007 में लाल मस्जिद पर सैन्य कार्रवाई की गई, जिसमें लगभग 90 धार्मिक विद्यार्थियों की मृत्यु हो गई थी।

 

- 9 मार्च 2007 को उन्होंने शीर्ष न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी को जबरन पदमुक्त कर दिया। उनके इस कदम के बाद समूचे पाकिस्तान में वकीलों ने मुशर्रफ के खिलाफ आंदोलन कर दिया।

 

मुशर्रफ पर फिलहाल लंबित मामले

- 2007 में आपातकाल के दौरान जजों को हिरासत में लिए जाने के मामले में भी केस चलाया गया।

 

- 2013 में नवाज शरीफ सरकार ने उन पर राजद्रोह का मुकदमा शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया। पाकिस्तान में इस आरोप के सही साबित होने पर मृत्युदंड तक का प्रावधान है।

 

 

Posted By: Kamal Verma

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