बिजनौर, जेएनएन। बेव सीरीज 'मिर्जापुर' स्टाइल में सरेबाजार कत्ल करने वाले हमलावर बेखौफ थे। उन्हें न पुलिस का खौफ था और ही कानून का डार। नई उम्र के यह अपराधी कत्ल कर मौका ए वारदात से भागने के बजाय दुकान के बाहर बैठ गए और आराम से सिगरेट पीते रहे। बीच-बीच में फायरिंग कर तमंचे लहराते हुए गवाही देने वालों को जान से मारने की धमकी देते रहे। सरेबाजार वारदात के बाद सनसनी फैल गई। बाजार पूरी तरह बंद हो गए। दुकानदार भाग खड़े हुए।

प्रारंभिक पूछताछ में घटना की वजह रंजिश और नई उम्र में दोनों गुटों में वर्चस्व कायम करने की जंग माना जा रहा है। हमलावर गैंग खड़ा कर अपना दबदबा स्थापित करना चाहते थे। रचित साप्ताहिक बाजार में दो दोस्तों के साथ खरीदारी करने आया था। बताया जा रहा है कि उसके दोस्त का जन्मदिन था। उसके लिए ही केक खरीदना था। रचित का एक दोस्त केक लेने चला गया। दूसरा उसके पास खड़ा था, तभी चारों हमलावर खुलेआम तमंचे लहराते हुए रचित के पास पहुंच गए। उसे हल्की भनक लगी तो उसने जान बचाने का काफी प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हो सका। वारदात के समय कोई भी बीच में नहीं आया।

गोलियों की तड़तड़ाहट से बाजार में भगदड़ मच गई। दुकानदार भाग खड़े हुए। मौके पर लोगों की चप्पल भी छूट गईं। वहीं कातिल इस कदर बेखौफ थे कि सनसनीखेज हत्याकांड के बाद दुकान के बाहर गेट पर ही बैठ गए। हवाई फायरिंग कर गवाही देने वाले की भी हत्या की धमकी दी। फिर तमंचा लहराते हुए वेब सीरीज स्टाइल में सिगरेट जलाई। धुएं का छल्ला उड़ाते हुए फिर से हवाई फायरिंग की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हत्यारोपित तीस मिनट बाद तक मौके पर रहे। चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें बाइक पर बैठा लिया। इस दौरान बाइक पर बैठते समय भी उनके चेहरों पर कोई खौफ नहीं था। स्टाइल में बालों में हाथ निकाला और एक बार फिर से स्थानीय लोगों को गवाही पर ललकारा। देर शाम घटना की सूचना पर पूर्व सांसद भारतेंद्र ¨सह घटनास्थल पर पहुंचे और लोगों से जानकारी ली।

पुरानी रंजिश और वर्चस्व की जंग

सीओ कुलदीप गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि दो हत्यारोपित काफी समय पहले रचित के साथ पढ़ते थे। रचित ने एक अंग्रेजी मीडियम स्कूल से इंटर किया था। हत्यारोपित सारिक और शादाब भी वहां पढ़ते थे। वहीं एक हत्यारोपित नूरपुर रोड पर पढ़ता था। पहले सभी आपस में दोस्त थे। एक साल से दोनों पक्षों में रंजिश शुरू हो गई थी। असल में रचित भी अपराधी प्रवृत्ति का था।

वह अक्सर युवकों के एक गुट में रहकर झगड़ा करता था। वहीं हत्यारोपित भी झालू क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते थे। इस बात को लेकर भी दोनों पक्षों में विवाद बढ़ रहा था। रचित भी हत्यारोपितों को चुनौती देते हुए झालू में खुलेआम घूमता था। यह बात भी हत्यारोपितों को अखरती थी, क्योंकि वह कस्बे में अपना दबदबा समझते थे।

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