मनोज त्रिपाठी, जालंधर। जालंधर-होशियारपुर रोड पर नौ किलोमीटर चलने के बाद गांव कंगनीवाल की एक इमारत से हाईवे तक आती जोर-जोर की दहाड़ और चीखें हर किसी का ध्यान खींच लेती हैैं। यह दहाड़ ग्रेट खली की सीडब्ल्यूई (कांटीनेंटल रेसलिंग इंटरटेनमेंट) एकेडमी में विदेशी पहलवानों को धूल चटाने के लिए तैयार हो रहे खली के शेरों की है।

फ्री स्टाइल कुश्ती में दुनिया भर में धाक जमाने वाले दिलीप सिंह राणा उर्फ खली ने डब्ल्यूडब्ल्यूई (वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट) से अलग होने के बाद चार माह पहले एकेडमी खोली और अब यहां कई पहलवान तैयार भी कर लिए हैं। खली खुद पहलवानों को ट्रेंड कर रहे हैैं। प्रोफेशनल तरीके से खोली गई देश की पहली एकेडमी में खली के 40 युवा ट्रेनिंग ले रहे हैं। इनमें लड़कियां भी हैैं।

पंजाब पुलिस से 2006 में नाता तोडऩे के बाद 2007 में विश्व चैैंपियन बने खली कहते हैं कि नशा पंजाब की जवानी लील गया। अभी भी वक्त है। युवाओं में जोश है। मोगा के लवप्रीत व हरियाणा के सतिंद्र तथा चंडीगढ़ के अली इसके उदाहरण हैैं जो डब्ल्यूडब्ल्यूई के लिए 1.4 करोड़ के करार पर अमेरिका गए हैैं। उत्साहित खली कहते हैं, 'जैसे-जैसे युवाओं को पता चल रहा है, वैसे-वैसे एकेडमी में भीड़ बढ़ रही है। अभी एक रिंग ही तैयार किया गया है। यहा रिंग खली ने ढाई लाख रुपये खर्च कर खुद तैयार करवाया है। दूसरा रिंग भी बनाने की तैयारी है।

राजस्थान का भज्जी अपना घर छोड़कर आया है। सामान्य सेहत और दुबले शरीर के भज्जी को देखकर नहीं लगता कि वह रिंग में भी उतर सकता है। खली दावा करते हैैं एक साल बाद भज्जी भी विदेशी पहलवानों को ढेर करेगा। एकेडमी में विदेशी पहलवान भी ट्रेनिंग देने आ रहे हैं। ट्रेनिंग की फीस 15 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम है।

लड़कियों की टीम भी हो रही तैयार

एकेडमी में लड़कियों की भी टीम तैयार की जा रही है। 100 किलो भार की दिल्ली की बॉबी भी इसी का हिस्सा हैै। छह फिट की बॉबी रोजाना 30 अंडे, तीन किलो दूध, 500 ग्राम दाल और दो चिकन खाने के बाद सहयोगी रीटा के साथ जब रिंग पर दहाड़ती है तो लड़के भी एक बार पीछे हट जाते हैैं। खली का कहना है कि 'मेरा लक्ष्य देश के कोने-कोने से शानदार जोशीले युवाओं की टीम तैयार करना है। देश में टैलेंट की कमी नहीं है। मैैं भी हिमाचल के सिरमौर जिले के छोटे से गांव से हूं। अगर मैं अमेरिका जाकर विदेशी पहलवानों को ङ्क्षरग में धूल चटा सकता हूं तो हमारे युवा क्यों नहीं।

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