आप में से अधिकतर को वो समय याद होगा, जब होली-दीवाली जैसे त्योहारों पर इतने एसएमएस भेजे जाते थे कि मोबाइल नेटवर्क ठप हो जाते थे। SMS की खोज फिनलैंड के मैटी मैक्नन ने की थी। पिज्जा खाते-खाते मैसेजिंग सर्विस का पहला कॉन्सेप्ट देने वाले 63 साल के मैटी का 2015 में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। जानिए ‘फादर ऑफ एसएमएस’ मैटी और एसएमएस की कहानी....

कॉल न लगे तो कैसे हो बात

फिनलैंड सिविल सेवा के अधिकारी मैक्नन साल 1984 में डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में एक टेलीकॉम कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने गए थे। लंच के दौरान मैटी ने टेलीकॉम एक्सपर्ट के सामने सवाल रखा कि अगर मोबाइल बंद हो तो किसी से कैसे संपर्क किया जाए? लोग जवाब सोच ही रहे थे कि मैटी ने टेक्स्ट मैसेज सर्विस का कॉन्सेप्ट रखा।

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लेकिन सबने इस कॉन्सेप्ट को खारिज कर दिया। 1985 में शोधकर्ता फ्रीडहैम हिलब्रांड और उनकी टीम के साथ मिलकर मैटी शॉर्ट मैसेजिंग सर्विस पर चुपचाप काम करते रहे। इसके बाद 1992 में पहला एसएमएस भेजा गया और 1994 में नोकिया द्वारा मैसेज टाइपिंग वाला फोन लॉन्च करने के बाद यह सर्विस दुनियाभर में खूब लोकप्रिय हुई।

नहीं कमाया पैसा

मैसेज भेजने की सर्विस भले ही शॉर्ट मैसेजिंग सर्विस के नाम से लोकप्रिय हुई हो, लेकिन मैटी ने इसका नाम मैसेज हैंडलिंग सर्विस रखा था। वह इसे कम शब्दों में संदेश भेजने का जरिया नहीं मानते थे। उनके मुताबिक यह सेवा भाषा के विकास का नया तरीका थी। मैटी ने अपनी टेक्नोलॉजी से पैसा नहीं बनाया। उन्होंने टेक्नोलॉजी का पेटेंट नहीं कराया। फादर ऑफ एसएमएस कहने पर मैटी चिढ़ जाया करते थे

लंबी पड़ताल के बाद मैटी का पता चला

मैटी लंबे अरसे तक गुमनाम रहे। हेलसिंकी के एक अखबार के रिपोर्टर ने लंबी पड़ताल के बाद मोबाइल की दुनिया बदल देने वाले मैटी का पता लगाया। काफी अनुरोध के बाद मैटी मैसेजिंग सर्विस की शुरुआत के पीछे की कहानी बताने को तैयार हुए। तब दुनिया ने उनके बारे में जाना। फिनलैंड की सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी फिननेट के सीईओ रहे मैटी, ‘ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ मोबाइल इंडस्ट्री के नाम से भी मशहूर थे।’

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