गुम फाइलों पर घिरे पीएम
कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह फिर विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। मामले से जुड़ी जरूरी फाइलें गायब होने पर विपक्ष ने प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोल दिया है। विपक्ष ने पौने दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के इस घोटाले से जुड़ी फाइलें गायब होने को प्रधानमंत्री को सीबीआइ जांच से बचाने का षडयंत्र करार दिया है।
नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह फिर विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। मामले से जुड़ी जरूरी फाइलें गायब होने पर विपक्ष ने प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोल दिया है। विपक्ष ने पौने दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के इस घोटाले से जुड़ी फाइलें गायब होने को प्रधानमंत्री को सीबीआइ जांच से बचाने का षडयंत्र करार दिया है।
मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने सोमवार को राज्यसभा में इस मामले को उठाते हुए खुद प्रधानमंत्री से सदन में आकर सफाई देने की मांग की। भाजपा के धर्मेद्र प्रधान ने शून्यकाल में यह मामला उठाया। उन्होंने कहा, 'कोल ब्लॉक आवंटन की महत्वपूर्ण फाइलें मंत्रालय से गायब हो गई हैं। जबकि, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआइ इस एक लाख 86 हजार करोड़ रुपये के घोटाले की जांच कर रही है। यह बहुत ही गंभीर मामला है। यह प्रधानमंत्री को बचाने का षडयंत्र है क्योंकि कोल ब्लॉक आवंटन के समय कोयला मंत्रालय उनके ही पास था। प्रधानमंत्री और उनके कार्यालय को बताना पड़ेगा कि वह क्या छिपाना चाहते हैं, जिसके लिए जरूरी फाइलें गायब हो गई हैं।'
नेता विपक्ष अरुण जेटली ने भी कहा, 'इस मामले में जांच के तीन ही मुख्य बिंदु थे। एक-फायदा लेने वाला यानी कोल ब्लॉक आवंटन से किसे फायदा हुआ। दो-स्क्रीनिंग कमेटी, जिसने आवंटन किया। तीन-तत्कालीन मंत्री और प्रधानमंत्री का ऑफिस। अब अकस्मात मामले से जुड़ी जरूरी फाइलें ही गायब हो गई। सरकार को इसका जवाब जरूर देना होगा। नहीं तो वह सुबूतों को मिटा देगी और फिर कहेगी कि कोई घोटाला ही नहीं हुआ।'
सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री राजीव शुक्ल ने कहा, सरकार कहां कह रही है कि फाइलें गायब होने का मुद्दा गंभीर नहीं है। सरकार कोयला मंत्री का बयान सदन में दिला सकती है। एक बार उनका वक्तव्य हो जाए, फिर सदस्य अपनी बात रख सकते हैं। इस पर भाजपा के वेंकैया नायडू ने कहा, मंत्री क्यों, प्रधानमंत्री क्यों नहीं। खुद प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि फाइलें गुम होने का सच क्या है?
''प्रधानमंत्री और उनके कार्यालय को बताना पड़ेगा कि वह क्या छिपाना चाहते हैं, जिसके लिए जरूरी फाइलें गायब हो गई हैं।'' -धर्मेद्र प्रधान
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