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    भारत में जिस दर से जनसंख्या बढ़ रही, उससे ज्यादा तेजी से छात्र कर रहे आत्महत्या; रिपोर्ट में खुलासा

    By Agency Edited By: Sachin Pandey
    Updated: Wed, 28 Aug 2024 05:42 PM (IST)

    भारत में छात्र आत्महत्या की दर जनसंख्या वृद्धि दर से अधिक हो गई है। यह चौंकाने वाला दावा एक हालिया रिपोर्ट में किया गया है जिसमें राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि छात्र आत्महत्या की दर कुल आत्महत्या के आंकड़ों को भी पार कर गई है।

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    छात्र आत्महत्या के मामलों में सालाना 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। (File Image)

    पीटीआई, नई दिल्ली। भारत में छात्र आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को लेकर एक नई रिपोर्ट में चिंताजनक ट्रेंड रेखांकित गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में छात्र आत्महत्या की घटनाएं जनसंख्या वृद्धि दर और कुल आत्महत्या के ट्रेंड को पार करते हुए चिंताजनक दर से बढ़ रही हैं।

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    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के आधार पर, 'छात्र आत्महत्याएं: भारत में फैली महामारी' रिपोर्ट बुधवार को वार्षिक आईसी 3 सम्मेलन और एक्सपो 2024 में लॉन्च की गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां कुल आत्महत्या संख्या में सालाना 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं छात्र आत्महत्या के मामलों की 'कम रिपोर्टिंग' के बावजूद, छात्र आत्महत्या के मामलों में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

    महिला छात्रों की आत्महत्या दर में वृद्धि

    पुरुष IC3 संस्थान द्वारा संकलित रिपोर्ट में कहा गया है, 'पिछले दो दशकों में छात्र आत्महत्याएं 4 प्रतिशत की चिंताजनक वार्षिक दर से बढ़ी हैं, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। 2022 में कुल छात्र आत्महत्याओं में पुरुष छात्रों की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत थी। 2021 और 2022 के बीच छात्र आत्महत्याओं में 6 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि महिला छात्रों की आत्महत्या में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।'

    पीटीआई के अनुसार रिपोर्ट में बताया गया है कि छात्र आत्महत्याओं की घटनाएं जनसंख्या वृद्धि दर और कुल आत्महत्या ट्रेंड, दोनों को पार कर रही हैं। पिछले दशक में 0-24 वर्ष के बच्चों की आबादी 582 मिलियन से घटकर 581 मिलियन हो गई, जबकि छात्र आत्महत्याओं की संख्या 6,654 से बढ़ कर 13,044 तक हो गई है।

    इन राज्यों में सबसे अधिक मौतें

    रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश को सबसे अधिक छात्र आत्महत्या वाले राज्यों के रूप में पहचाना जाता है, जो कुल घटनाओं का एक तिहाई है। दक्षिणी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सामूहिक रूप से इन मामलों में 29 प्रतिशत का योगदान देते हैं, जबकि राजस्थान, जो अपने उच्च-स्तरीय शैक्षणिक माहौल के लिए जाना जाता है, 10वें स्थान पर है, जो कोटा जैसे कोचिंग केंद्रों से जुड़े दबाव को उजागर करता है।