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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 14, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

...जब होली और हज यात्रियों के लिए रोकनी पड़ी थी ट्रेन, अप्रिय घटना से बचने के लिए उठाया था कदम; पढ़ें इनसाइड स्टोरी

By Agency Edited By: Jeet Kumar
Published: Fri, 14 Mar 2025 02:18 AM (IST)

दो मार्च 1999 को होली वाले दिन जब हज यात्रियों को उत्तर प्रदेश के सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील मऊ से ...और पढ़ें

जब होली और हज यात्रियों के लिए रोकनी पड़ी थी ट्रेन (सांकेतिक तस्वीर)
जब होली और हज यात्रियों के लिए रोकनी पड़ी थी ट्रेन (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. 1999 में मऊ में किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए उठाया गया था यह कदम
  2. अब 26 वर्ष बाद आज खासतौर पर संभल में इसी तरह की स्थिति बनती दिख रही

 पीटीआई, नई दिल्ली। दो मार्च, 1999 को होली वाले दिन, जब हज यात्रियों को उत्तर प्रदेश के सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील मऊ से दिल्ली के लिए ट्रेन में सवार होना था, तब किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन को ट्रेन को अस्थायी रूप से रोकने के लिए लोको पायलट पर निषेधाज्ञा लगानी पड़ी थी।

यह कदम हज यात्रियों का सामना रंगों का पर्व मना रहे लोगों से नहीं होने देने के लिए उठाया गया था। अब 26 वर्ष बाद फिर उसी तरह की स्थिति बनती दिख रही है। रमजान के दौरान विभिन्न राज्यों खासतौर पर उत्तर प्रदेश के संभल में प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए कमर कस रहा है कि शुक्रवार को जुमे की नमाज और होली दोनों शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो जाए।

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ने अपनी पुस्तक में किया जिक्र

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह की पुस्तक 'थ्रू माई आइज: स्केचेस फ्राम ए काप्स नोटबुक' में 1999 में होली वाले दिन मऊ के अधिकारियों के सामने आईं चुनौतियों का विस्तार से जिक्र किया गया है।

उन्होंने पुस्तक में लिखा है कि रेलवे ने होली समाप्त होने तक दोपहर में पहुंचने वाली ट्रेन को कुछ घंटे विलंबित करने के अधिकारियों के आग्रह को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद मऊ के अधिकारियों ने लोको पायलट पर निषेधाज्ञा लगा दी।

भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ

भारत के इतिहास में पहली बार धारा 144 का उपयोग एक चलती ट्रेन को रोकने के लिए किया गया। दंड प्रक्रिया संहिता की इस धारा का उपयोग आमतौर गैरकानूनी रूप से लोगों के जमा होने और शांति व्यवस्था में खलल रोकने के लिए किया जाता है।

अधिकारियों ने रेलवे से मदद मांगी थी

मऊ जिले में सांप्रदायिक हिंसा के इतिहास को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने रेलवे से मदद मांगी थी। हालांकि रेलवे ने यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि ट्रेनों की समय-सारिणी में बदलाव नहीं किया जा सकता, चाहे स्थिति कितनी भी संवेदनशील क्यों न हो।

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