नई दिल्ली। तीन साल पहले साल 2012 को दिल्ली की सड़कों पर कुछ दरिंदों ने निर्भया के संग हैवानियत का वो खेल खेला जिससे ना केवल देश शर्मसार हुआ बल्कि मानवता भी रो पड़ी। राजधानी की सड़कों पर जनता ने संसद से मांग की थी कि बलात्कार के मामलों से निपटने के लिए अब सख्त कानून की जरूरत है। नाबालिग अपराधी महज लचर कानून की वजह से रिहा हो जाते हैं। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में बदलाव के लिए लड़ी जा रही लड़ाई में मंगलवार को अहम कामयाबी मिली। राज्य सभा ने बिना किसी संशोधन जुवेनाइल जस्टिस बिल को पारित कर दिया ।

नाबालिग और देश का कानून

1. भारत में 18 वर्ष से कम उम्र का मुजरिम नाबालिग माना जाता है। लेकिन अब जघन्य अपराधों के लिए 16 से 18 साल के किशोर अपराधियों पर वयस्क की तरह मुकदमा चलेगा।

2. नाबालिग आरोपी की सुनवाई सिर्फ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में ही होती है। लेकिन जघन्य मामलों में सुनवाई अदालतों में होगी।


3. सज़ा के तौर पर ज्यादा से ज्यादा 3 वर्ष तक ही नाबालिग दोषी को बाल सुधार गृह में रखा जा सकता है। लेकिन जघन्य अपराधों में धाराओं के मुताबिक सजा दी जाएगी।

4. इस बिल में हत्या और बलात्कार जैसे जघन्य अपराध करने वाले 16 से 18 वर्ष के नाबालिगों पर आम अपराधी की तरह मुकदमा चलाए जाने का प्रावधान है।


5. इस बिल की ज़रूरत इसलिए भी थी क्योंकि देश में 16-18 आयुवर्ग के अपराधियों की संख्या बढ़ रही है।


6. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के मुताबिक वर्ष 2013 में नाबालिग आरोपियों में 66 फीसदी की उम्र 16 से 18 वर्ष के बीच थी।


8. साल 2010 से 2014 के दौरान देश में नाबालिगों द्वारा अपराध के 1 लाख 41 हजार 52 मामले दर्ज किये गये।

भारत में नाबालिगों की अपराध दर-

भारत में कुल अपराधों की संख्या में नाबालिगों द्वारा किए गए अपराध महज 1.2 फीसद ही है।किशोरों द्वारा किए गए सबसे अधिक अपराध धन संबंधी रहे हैं। इसमें सर्वाधिक चोरी, लूटमार, सेंधमारी के मामले हैं। किशोरों के अपराध की सबसे अधिक दर मध्यप्रदेश में है, दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र है।

किस उम्र में माना जाए बालिग ?

यूएन कन्वेंशन ऑन चाइल्ड राइट्स- 18 वर्ष

जस्टिस वर्मा समिति- 18 वर्ष

प्रस्तावित विधेयक -18 वर्ष और जघन्य अपराध के लिए 16 वर्ष

यौन अपराधियों के नाम हों सार्वजनिक

ब्रिटेन- नाबालिग अपराधी भी सार्वजनिक सूची में शामिल

अमेरिका- कुछ मामलों में नाबालिग अपराधी सार्वजनिक सूची में शामिल

यूएन कन्वेंशन ऑन चाइल्ड राइट्स- नाबालिग अपराधियों के नाम सार्वजनिक सूची में न हो शामिल

नाबालिग और दूनिया के कानून

1. अमेरिका के कई राज्यों में हत्या और बलात्कार जैसे संगीन अपराध करने वाले 14 वर्ष से ज्यादा आयु के नाबालिगों का केस सामान्य अदालतों में चलता है और सभी कानून लागू होते हैं।


2. न्यूयॉर्क में 16 वर्ष से ज्यादा उम्र के आरोपी को नाबालिग नहीं माना जाता और जघन्य अपराध के दोष में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।


3. कनाडा में 12 वर्ष से ज्यादा उम्र के अपराधी का केस यूथ जस्टिस कोर्ट्स में चलता है। 5 वर्ष से ज्यादा की सजा पाने वाला अपराधी जब 18 वर्ष का हो जाता है तो उसे सुधार गृह से निकालकर सामान्य जेल में भेज दिया जाता है।


4. ब्रिटेन में जघन्य अपराध में शामिल 10 से 18 वर्ष के दोषियों को कोई रियायत नहीं मिलती और उन्हें उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है।


5. चीन में चौदह से अठारह वर्ष के बच्चों का अपराध साबित होने पर उन्हें आम अपराधियों की तरह सजा दी जाती है।


6. सऊदी अरब में बच्चों और किशोर अपराधियों को सजा देने में कोई रियायत नहीं बरती जाती। सऊदी अरब में बैंक लूट की वारदात में शामिल सात नाबालिग दोषियों को वर्ष 2013 में फांसी दे दी गई थी।


नया कानून के बन जाने के बाद भी निर्भया गैंगरेप कांड के नाबालिग आरोपी को नये कानून के हिसाब से सज़ा नहीं मिल सकेगा। क्योंकि कानून गुजरी हुई तारीखों से नहीं लागू होते।

बच नहीं पाएंगे खूूंखार किशोर, राज्यसभा से जुवेनाइल जस्टिस बिल पास

Posted By: Lalit Rai