नई दिल्‍ली, जागरण स्‍पेशल। महाराष्‍ट्र के वर्धा के पुलगांव स्थित हथियार डिपो में हुए धमाके में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है जबकि एक दर्जन के करीब घायल बताए जा रहे हैं। यह विस्‍फोट उस वक्‍त हुआ जब हथियारों को नष्‍ट किया जा रहा था। यहां स्थित सेंट्रल एम्युनिशन डिपो सैन्य क्षेत्र में सबसे बड़ा डिपो है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि इस डिपो में एंटी टैंक मिसाइल से लेकर ब्रह्मोस मिसाइल तक रखी गई है। इकसे अलावा यहां पर बम, ग्रेनेड, राइफल्‍स समेत दूसरे हथियार और गोला बारूद रखा गया है। यहां से इन्‍हें जरूरत के हिसाब से दूसरी जगहों पर भेजा जाता है। यह हथियार डिपो नागपुर से करीब 115 किमी दूर है। बहरहाल, आपको बता दें कि इसी हथियार डिपो में पहले भी धमाका हो चुका है। इसको हथियारों का मक्‍का भी कहा जाता है। 

कैग की चौकाने वाली रिपोर्ट
आगे बढ़ने से पहले आपको यहां पर ये भी बताना जरूरी होगा कि वर्ष 2016 में आई कैग की एक रिपोर्ट में खराब मिसाइलों और गोला बारूद के रखरखाव को लेकर चिंता व्‍यक्‍त की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि देश के 16 हथियार डिपो में करीब 47.29 करोड़ रुपये की एक लाख से अधिक ऐसी एंटी टैंक माइंस रखी गई हैं जो खराब हैं। वर्धा के जिस डिपो में इस बार धमाका हुआ है वहां पर इससे पहले खराब एंटी टैंक माइंस के फटने से ही हादसा हुआ था। उस वक्‍त यहां के 192 शेडस में करीब 333 मैट्रिक टन एंटी टैंक माइंस का जखीरा मौजूद था।

मई 2016 में इसी डिपो में जबरदस्‍त आग लगी थी जिसके बाद यहां जबरदस्‍त धमाका हुआ था। इस धमाके में 18 लोगों की जान चली गई थी, जबकि करीब इतने ही लोग घायल भी हो गए थे। यहां पर हुआ धमाका इतना तेज था कि करीब दस किमी के दायरे में इस धमाके की आवाज सुनी गई। इस धमाके की वजह से कई किमी के दायरे में मकान क्षतिग्रस्‍त हो गए थे। इस हादसे में मरने वालों में एक सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल, एक मेजर एक अन्‍य जवान और 13 दमकलकर्मी शामिल थे। यह धमाका एंटी टैंक मिसाइल के फटने से हुआ था। स्‍थानीय लोगों के मुताबिक उन्‍होंने तेज धमाके के साथ आग का गोला और धुएं का गुबार डिपो की तरफ से उठते हुए देखा था। इससे कुछ ही समय पहले इस डिपो को सोलर एनर्जी के इस्‍तेमाल के लिए पुरस्‍कृत किया गया था। यह डिपो करीब 7 हजार एकड़ में फैला है।

इससे पहले 1989 और 1995 में भी यहां पर धमाका हो चुका है। हालांकि इस दौरान किसी की मौत नहीं हुई थी। लेकिन करोड़ों का गोला बारूद नष्‍ट हो गया था। इस हथियार के दोनों और पहाडि़यां हैं। इनके आगे अगारगांव, पिपरी, नाचनगांव और मागेझारी गांव है। मागेझारी इस डिपो के सबसे अधिक करीब है। इसमें करीब 1500 लोग रहते हैं जबकि नाचनगांव में ढाई हजार लोग रहते हैं। वहीं अगारगांव में 3500 और पिपरी में 800 लोग रहते हैं।

सितंबर 2017 में पंजाब के भटिंडा में स्थित हथियार डिपो में अचानक आग लग गई थी, जिसके बाद वहां पर धमाके की आवाज भी सुनी गई थी। लेकिन गनिमत ये हुई कि इस हादसे में किसी की मौत नहीं हुई और समय रहते आग पर काबू पा लिया गया। यह घटना तड़के में हुई थी।

कई देशों में भी हो चुके हैं ऐसे ही धमाके  

नवंबर 2018 में तुर्की में भी एक हथियार डिपो में जबरदस्‍त धमाका हुआ था जिसमें चार जवानों की मौत हो गई थी। यह धमाका हक्‍कारी प्रांत में स्थित हथियार डिपो में हुआ था। यह हथियार डिपो इराक और ईरान सीमा से लगती सीमा पर स्थित है, जहां पर पर तुर्की ने बड़े हथियारों को रखा हुआ है।

अक्‍टूबर 2018 में यूक्रेन की राजधानी किव में स्थित हथियार डिपो में हुए धमाके के बाद वहां से करीब दस हजार लोगों को सुरक्षित स्‍थानों पर पहुंचाया गया था। यह हथियार डिपो राजधानी किव से करीब 176 किमी दूर स्थित है। हालांकि इस डिपो में हुए धमाके की वजह अब तक भी साफ नहीं हो सकी है। इसको लेकर अब भी जांच जारी है। इस धमाके की वजह से बीस किमी के दायरे में एयरस्‍पेस को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। इसके अलावा ट्रेन और बस यातायात को भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। यह हथियार डिपो यूक्रेन के तीन बड़े डिपो में से एक है। यहां पर बड़े और खतरनाक हथियारों का जखीरा रखा गया है।

जून 2016 में श्रीलंका के सलावा स्थित हथियार डिपो में हुए धमाके ने तीन किमी के दायरे में मकानों को ध्‍वस्‍त कर दिया था। करीब छह घंटों तक इस डिपो से धमाके की आवाज आती रही। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी।

मार्च 2014 में इंडोनशिया की राजधानी जकार्ता के समीप स्थित एक हथियार डिपो में हुए धमाके से एक जवान की मौत हो गई थी। इस डिपो में लाइट एम्‍यूनिशन रखा गया था।

अप्रैल 1988 में पाकिस्‍तान रावलपिंडी और इस्‍लामाबाद के बीच स्थित हथियार डिपो में हुए धमाके से सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। धमाके के बाद कई जगहों पर मोर्टार, ग्रेनेड के धमाके हुए जिससे जानमाल का काफी नुकसान हुआ था।

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Posted By: Kamal Verma

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