Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Waqf Act: 'मीलॉर्ड वक्फ पर कब्जा करने के लिए बनाया गया कानून', CJI गवई के सामने कपिल सिब्बल ने क्या-क्या दी दलीलें?

    Updated: Tue, 20 May 2025 07:47 PM (IST)

    वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं के अलावा शीर्ष अदालत में दो और याचिकाएं सुनवाई पर लगी थीं जिनमें मूल वक्फ कानून को चुनौती दी गई है और मूल वक्फ कानून 1995 व 2013 को गैर मुस्लिमों के प्रति भेदभाव वाला बताते हुए रद करने की मांग की गई है।

    Hero Image
    वक्फ संशोधन कानून 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं को लेकर सुनवाई चल रही।(फाइल फोटो)

    माला दीक्षित, नई दिल्ली। वक्फ संशोधन कानून 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं में अंतरिम आदेश के मुद्दे पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। कानून को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से कानून पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कानून का विरोध करते हुए दलील दी कि कहा जा रहा है कि यह कानून वक्फ की सुरक्षा के लिए है , जबकि इसका उद्देश्य वक्फ पर कब्जा करना है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान कानून का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं से वक्फ पंजीकृत कराने की कानूनी अनिवार्यता और पंजीकृत न कराने पर कानूनी परिणाम के बारे में सवाल पूछे। मामले में केंद्र सरकार की ओर से बुधवार को पक्ष रखा जाएगा।

    कानून पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की गई

    सुप्रीम कोर्ट में बहुत सी याचिकाएं लंबित हैं जिनमें वक्फ संशोधन कानून 2025 की वैधानिकता को चुनौती दी गई है। मामले में प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ सुनवाई कर रही है। वक्फ संशोधन कानून 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं में कानून पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की गई है जबकि दूसरी ओर केंद्र सरकार ने कोर्ट में दाखिल किए गए जवाब में कानून को सही ठहराते हुए अंतरिम रोक का विरोध किया है।

    वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं के अलावा शीर्ष अदालत में दो और याचिकाएं सुनवाई पर लगी थीं जिनमें मूल वक्फ कानून को चुनौती दी गई है और मूल वक्फ कानून 1995 व 2013 को गैर मुस्लिमों के प्रति भेदभाव वाला बताते हुए रद करने की मांग की गई है। हरिशंकर जैन और पारुल खेड़ा की इन याचिकाओं पर भी कोर्ट नोटिस जारी कर चुका है लेकिन अभी तक केंद्र ने इनका जवाब दाखिल नहीं किया है। हालांकि मंगलवार को इन याचिकाओं पर सुनवाई का नंबर नहीं आया।

    यह कानून वक्फ पर कब्जा करने के लिए बनाया गया: कपिल सिब्बल

    मंगलवार को अंतरिम आदेश के मुद्दे पर पहले याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पक्ष रखना शुरू किया। सिब्बल की दलील थी कि कहा जा रहा है कि यह कानून वक्फ की सुरक्षा के लिए है, जबकि इसका उद्देश्य वक्फ पर कब्जा करना है। उन्होंने कहा कि कानून इस तरह बनाया गया है कि बिना किसी प्रक्रिया का पालन किये वक्फ संपत्ति छीन ली जाए।

    सिब्बल ने कानून की विभिन्न धाराओं को उल्लेखित कर उनकी वैधानिकता पर सवाल उठाया और वक्फ संशोधन कानून 2025 को संविधान के अनुच्छेद 25 और 25 में मिले धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया।

    उन्होंने संशोधित कानून में वक्फ बाई यूजर को खत्म करने, केंद्रीय वक्फ परिषद में और राज्य वक्फ बोर्डों में गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने और वक्फ करने वाले के लिए पांच साल का प्रेक्टिसिंग मुस्लिम होने की शर्त पर सवाल उठाया।

    उन्होंने गैर पंजीकृत वक्फ को वक्फ संपत्ति न माने जाने पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं का पक्ष स्पष्ट समझने के लिए कई सवाल पूछे जैसे कि क्या पहले के वक्फ कानून में वक्फ पंजीकृत कराना जरूरी था या स्वैच्छिक था। और क्या पंजीकृत न कराने का कोई परिणाम भी तय था।

    अभिषेक मनु सिंघवी, सीयू सिंह जैसे वकीलों ने भी रखा अपना पक्ष

    सिब्बल ने कहा कि कानून में वक्फ पंजीकृत कराने की बात थी और मुतवल्ली की जिम्मेदारी थी वक्फ पंजीकृत कराएं और पंजीकरण न कराने पर मुतवल्ली पर कार्रवाई होने की बात थी लेकिन उस कानून में वक्फ समाप्त हो जाने जैसी कोई बात नहीं थी। सिब्बल के अलावा याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी, सीयू सिंह, राजीव धवन, हुजैफा अहमदी ने भी पक्ष रखा।

    सभी ने याचिकाओं पर अंतिम फैसला आने तक कानून पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता और सरकार दोनों को बहस के लिए दो-दो घंटे का समय दिया था लेकिन आज सारा दिन याचिकाकर्ताओं की ओर से ही बहस होती रही। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बुधवार को पक्ष रखेंगे। इसके अलावा कानून का समर्थन करने वाले कुछ राज्य व अन्य याचिकाकर्ता भी अपना पक्ष रखेंगे।

    यह सुनवाई टुकड़ों में नहीं हो सकती: अभिषेक मनु सिंघवी

    मंगलवार को मामले पर नियमित बहस शुरू होने के पहले केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि कोर्ट ने अंतरिम आदेश के पहलू पर तीन मुद्दे तय किये थे और उन्हीं तीन मुद्दों पर केंद्र सरकार ने अपना जवाब दाखिल किया है। कोर्ट को उन्हीं तीन मुद्दों तक सुनवाई सीमित रखनी चाहिए।

    लेकिन कपिल सिब्बल ने मेहता की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि कोर्ट ने मामले पर बहस को सिर्फ तीन मुद्दों तक सीमित रखने का कोई आदेश नहीं दिया था। बहस कानून के सभी मुद्दों पर होगी। दूसरे याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा कि सुनवाई टुकड़ों में नहीं हो सकती।

    सिर्फ पांच मुख्य याचिकाओं पर ही विचार करेगा कोर्ट

    वक्फ संशोधन कानून 2025 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं में संशोधित कानून को मुसलमानों के धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए रद करने की मांग की गई है। वैसे तो कोर्ट में दो दर्जन याचिकाएं दाखिल हुईं थी लेकिन पिछली सुनवाई 17 अप्रैल को कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार व अन्य को नोटिस जारी करते वक्त ही साफ कर दिया था कि वह सिर्फ पांच मुख्य याचिकाओं पर ही विचार करेगा। उन पांच याचिकाओं में एआइएमआइएम के प्रमुख असदुद्दीन ओबैसी व जमीयत उलमा ए हिन्द की याचिका शामिल हैं।

    पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने अंतरिम आदेश के मुद्दे पर केंद्र की ओर दिये गए आश्वासन को आदेश में दर्ज किया था। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि कोर्ट के अगले आदेश तक केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति नहीं की जाएगी इसके अलावा केंद्र ने यह भी कहा था कि अधिसूचित या पंजीकृत वक्फ जिनमें वक्फ बाई यूजर (उपयोग के आधार पर वक्फ) भी शामिल हैं, उन्हें गैर अधिसूचित नहीं किया जाएगा और न ही उनकी प्रकृति में बदलाव किया जाएगा।

    कोर्ट ने उसी दिन आदेश में कह दिया था कि अगली तारीख पर होने वाली सुनवाई प्रारंभिक सुनवाई होगी और अगर जरूरत हुई तो अंतरिम आदेश भी दिया जाएगा। उसी आदेश के मद्देनजर मंगलवार को कोर्ट में वक्फ संशोधन कानून पर अंतरिम रोक लगाने की मांग पर सुनवाई शुरू हुई।

    यह भी पढ़ें: ज्यूडिशियल सर्विस में प्रवेश के लिए 3 साल की प्रैक्टिस अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला