रांची, संजय कुमार। घर में पूजा हो या मंदिर में, एक अदद पुजारी पहली जरूरत होते हैं। शहर हों या गांव, पुजारियों की किल्लत से सभी परेशान हैं। मंदिरों में आरती की दिक्कत है तो विशेष तिथियों और पूजा के दिनों में पंडितों की मारामारी। इस बदलते दौर में ब्राह्मणों की नई पीढ़ी पूजा पाठ में रुचि न लेकर नौकरी में ज्यादा रुचि दिखा रही है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इस समस्या के समाधान की ओर कदम उठाया है। विहिप पुजारियों और कर्मकांडियों की बड़ी कतार खड़ी करने में जुटी है। इसमें ब्राह्मण समेत सभी वर्गों के लोग शामिल हैं।

समाज में किसी को कोई आपत्ति न हो इसकी मुकम्मल तैयारी की गई है। शंकराचार्यों एवं साधु संतों से इसकी अनुमति ली गई है। ब्राह्मण समाज के लोगों से भी चर्चा हुई थी। झारखंड से शुरू हुई पहल आने वाले दिनों में देश के अन्य हिस्सों में भी असर दिखाएगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब मंदिरों के घंटे समय से गूंजेंगे, आपको पूजा-पाठ और कर्मकांड के लिए प्रशिक्षित पंडितों की किल्लत से भी नहीं जूझना होगा। पिछले दिनों रांची में पूरे झारखंड से हर वर्ग से आए 50 से अधिक लोगों को पुजारी का प्रशिक्षण दिया गया। कोशिश है कि मंदिरों में पूजा पाठ न रुके और जो लोग पूजा कराते हैं वे भी बेहतर तरीके से पूजा कराएं।

समस्या से निदान की पहल
विश्व हिंदू परिषद के झारखंड-बिहार के क्षेत्रीय संगठन मंत्री केशव राजू ने कहा कि गांवों में पुजारियों की काफी कमी हो गई है। अब तक ब्राह्मण परिवार के लोग ही पूजा कराते थे। लेकिन धीरे-धीरे पूजा कराने का काम ये छोड़ते जा रहे हैं। या तो लोग नौकरी में चले गए या शहरों की ओर रुख कर लिया। इससे गांवों के मंदिरों में आरती करने वाले भी नहीं मिल रहे। मंदिर में गलत लोगों का जमावड़ा हो रहा है। इस समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए विहिप ने पहल की है। समाज में समरसता आए भी इसका बड़ा उद्देश्य है।

सबसे बात कर बनी सहमति
केशव राजू ने कहा कि काम आसान नहीं था। विहिप ने ब्राह्मण समाज के लोगों से बातचीत की। उनका समर्थन लिया। मैंने स्वयं श्रृंगेरी पीठाधीश, पेजावर स्वामी, वासुदेवानंद सरस्वती आदि से बातचीत की। कांची पीठ के तत्कालीन शंकराचार्य स्वर्गीय जयेंद्र सरस्वती ने भी इसका समर्थन किया था। उन्होंने मेरी बात पर सहमति जताते हुए माना की गांवों में ब्राह्मण वर्ग में पुजारियों की कमी हो रही है।

अब हर वर्ग में पुजारी तैयार किया जा सकता है। उसके बाद पूजा कराने की पद्धति के लिए प्रशिक्षण देने का काम शुरू किया गया। पिछले दिनों रांची के जगन्नाथपुर मंदिर परिसर में ही इसकी व्यवस्था की गई। उसी मंदिर के मुख्य पुजारी ने प्रशिक्षण देने का काम किया। इसके लिए एक पुस्तक तैयार की गई है। पलामू के 50 गांवों से यह अभियान शुरू हो चुका है।

25 जगह विहिप की वेदशाला
केशव राजू ने कहा कि विहिप पूरे देश में काशी सहित 25 स्थानों पर वेदशाला चला रही है। यहां निशुल्क वेदों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। समाज के हर वर्ग के लोग पढ़ रहे हैं। इसके लिए विहिप ने अखिल भारतीय संस्कृत विभाग की स्थापना की है, जिसके प्रमुख राधाकृष्ण हैं। राजू ने कहा कि यदि सरकार मंदिरों के पुजारियों को मानदेय देना शुरू करती है तब समाज के और लोग भी आगे आएंगे। विहिप चाहता है कि देश के हर मंदिर में नियमित रूप से साफ-सफाई व आरती हो। इसमें समाज के हर वर्ग के लोगों को पहल करनी चाहिए।

ट्रेनिंग शुरू
झारखंड विहिप के उपाध्यक्ष चंद्रकांत रायपत ने कहा, सभी वर्ग के लोगों को पूजा पाठ का प्रशिक्षण देने का काम शुरू हो गया है। जो लोग पहले से पूजा कराते आए हैं उन्हें भी सिखाया जा रहा है कि कैसे दोष रहित पूजा हो। आने वाले समय में एक हजार से अधिक लोगों को इससे जोड़ने की तैयारी अंतिम चरण में है।

Posted By: Alok Shahi

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