विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 16, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

2000 से अधिक प्रजातियां, 1.5 लाख से अधिक विलुप्त जानवर... 3500 एकड़ में फैले वनतारा की ये है खासियत

Published: Tue, 16 Sep 2025 06:00 AM (IST)

जामनगर गुजरात में स्थित वनतारा 3500 एकड़ में फैला दुनिया का सबसे बड़ा पशु बचाव पुनर्वास और संरक्षण केंद्र है। ...और पढ़ें

यहां जानवरों की देखभाल के लिए हजारों कर्मचारी और डॉक्टर मौजूद हैं (फोटो: वनतारा)
यहां जानवरों की देखभाल के लिए हजारों कर्मचारी और डॉक्टर मौजूद हैं (फोटो: वनतारा)

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वनतारा गुजरात के जामनगर स्थित लगभग 3500 एकड़ का दुनिया का सबसे बड़ा पशु बचाव, पुनर्वास और संरक्षण केंद्र है। इसका प्रबंधन उद्योगपति मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी करते हैं। यह अनंत का ड्रीम प्रोजेक्ट है।

अनंत ''जीव सेवा'' (पशु देखभाल) की भावना के साथ इसकी शुरुआत की है। इसका लक्ष्य घायल जानवरों को बचाना, उनका इलाज करना, और लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण करना है। वनतारा का उद्देश्य लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाना और उनके आवासों को पुनस्र्थापित करना है। यहां जानवरों की देखभाल के लिए हजारों कर्मचारी और डॉक्टर मौजूद हैं।

सरकार से मिल चुका है सम्मान

वनतारा में जानवरों को जंगल जैसा प्राकृतिक माहौल मिलता है। इस पहल को भारत सरकार द्वारा 'कॉरपोरेट' श्रेणी में पशु कल्याण के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार, 'प्राणी मित्र' से सम्मानित किया जा चुका है। वनतारा में दो हजार से अधिक प्रजातियों और 1.5 लाख से ज्यादा बचाए गए विलुप्त और संकटग्रस्त जानवर रहते हैं।

वनतारा 48 से अधिक प्रजातियों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा संरक्षण और प्रजनन केंद्र भी है। वनतारा में एशिया का पहला वन्यजीव अस्पताल है, जिसमें सीटी स्कैन और एमआरआई यूनिट्स हैं। यहां दुनिया का सबसे बड़ा और भारत का एकमात्र पशु वन्यजीव क्वारंटाइन सेंटर भी है।

यह दुनिया का सबसे बड़ा हाथी देखभाल केंद्र है, जिसमें 250 से अधिक हाथियों के झुंड हैं। वनतारा ने 2019 कोविड-19 महामारी के दौरान दुनियाभर से 25,000 से अधिक जानवरों को बचाया। वनतारा में 75 से अधिक वन्यजीव पशु एंबुलेंसों का दुनिया का सबसे बड़ा बेड़ा है।

यह भी पढ़ें- 'कोई अच्छा काम कर रहा तो बदनाम मत करो', वनतारा को सुप्रीम कोर्ट से मिली क्लीनचिट