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Economic Survey: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- भारत वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरने के लिए तैयार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरने के लिए तैयार है और आर्थिक सर्वेक्षण 2023 में सभी क्षेत्रों में वृद्धि से इसका पता चलता है। शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और विकास के पीछे की योजना की भी सराहना की।

By AgencyEdited By: Sonu GuptaPublished: Wed, 01 Feb 2023 04:02 AM (IST)Updated: Wed, 01 Feb 2023 06:09 AM (IST)
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- भारत वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरने के लिए तैयार

नई दिल्ली, एएनआई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि भारत वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरने के लिए तैयार है और आर्थिक सर्वेक्षण 2023 में सभी क्षेत्रों में वृद्धि और आशावाद से इसका पता चलता है। शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और विकास के पीछे की योजना की भी सराहना की। उन्होंने कहा, " आर्थिक सर्वेक्षण 2023 ने पुष्टि की है कि पीएम मोदी ने महामारी के दौरा भी अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया है। जब पूरी दुनिया मंदी का सामना कर रही है, तो भारत के सभी क्षेत्रों में विकास और आशावाद से पता चलता है कि भारत एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरने के लिए तैयार है।"

वर्ष 2023-24 में 6.8 प्रतिशत होगा जीडीपी

आर्थिक सर्वेक्षण 2023 के अनुसार, भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वर्ष 2023-24 में 6.0 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6.8 प्रतिशत हो जाएगा। हालांकि यह

आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करता है। संसद में मंगलवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 का साफ संकेत है कि मोदी सरकार आर्थिक सुधारों की बड़ी डोज पर काम कर रही है। इन सुधारों में उद्योग जगत को लाइसेंस व इंस्पेक्टर राज से मुक्ति दिलाने पर खास जोर हो सकता है। इसमें प्रशासनिक सुधारों को लेकर कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण कदम भी शामिल है, जो भारत को विकासशील देशों की श्रेणी से निकालकर विकसित देशों की श्रेणी में रखने में मददगार साबित होंगे।

एमएसएमई के लिए ऋण वृद्धि तेज रहने की संभावना

संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 में एमएसएमई के लिए ऋण वृद्धि तेज रहने की संभावना है। हालांकि इसके लिए जरूरी होगा कि मुद्रास्फीति सामान्य बनी रहे और ऋण की लागत भी कम हो। सर्वेक्षण में कहा गया है कि अगर वित्त वर्ष 2024 में मुद्रास्फीति में गिरावट दर्ज की जाती है और यदि ऋण की वास्तविक लागत में वृद्धि नहीं होती है, ऋण वृद्धि तेज होने की संभावना रहेगी।

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