नई दिल्‍ली (आनलाइन डेस्‍क)। यूएन जनरल असेंबली के 77वें सत्र का आगाज मंगलवार से शुरू हो रहा है। इस सत्र की अध्‍यक्षता Csaba Korosi करेंगे। इससे पहले 76वें सत्र के अध्‍यक्ष अब्‍दुल्‍ला शाहिद ने नए अध्‍यक्ष को औपचारिक रूप से इसकी जिम्‍मेदारी सौंप दी। इस मौके पर यूएन महासचिव ने कहा कि शाहिद के बिना 76वां सत्र चलाना संभव नहीं था। इस बार का ये सत्र ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब दुनिया के अधिकतर बड़े देशों में कड़वाहट घुली हुई है। वहीं विश्‍व के अधिकतर देशों में पड़ी मौसमी मार का भी असर इस सत्र पर जरूरी दिखाई देगा। इस सत्र की शुरुआत से पहले रूस की तरफ से कहा गया कि संयुक्‍त राष्‍ट्र की जनरल असेंबली में शामिल होने के लिए उसके प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका ने वीजा जारी कर दिया है।

रूस ने लगाया अमेरिका पर आरोप

इससे पहले रूस ने आरोप लगाया था कि अमेरिका इस आम सभा में शामिल होने के लिए उसके प्रतिनिधिमंडल को वीजा जारी नहीं कर रहा है। रूस की तरफ से ये भी कहा गया था कि ये अंतरराष्‍ट्रीय नियमों का उल्‍लंघन है। इस नाराजगी के बाद ही अमेरिका की तरफ से रूस के विदेश मंत्री सर्गी लावरोव और अन्‍य सभी सदस्‍यों को वीजा जारी कर दिया गया।

पूरी दुनिया की टिकी रहेंगी नजरें

बहरहाल, यूएन महासभा की आम बैठक पर इस बार पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। इस बार इसके केंद्र में भारत और पाकिस्‍तान नहीं होंगे, बल्कि रूस और यूक्रेन होंगे। ये सत्र ऐसे समय में हो रहा है कि जब इन दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़े 7 माह पूरे होने वाले हैं। इस दौरान यूक्रेन को जान-माल की भारी क्षति उठानी पड़ी है। यूक्रेन के इस युद्ध में करीब 30 लाख शरणार्थियों को दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ी है। उसको अरबों डालर का नुकसान उठाना पड़ा है। इस युद्ध की वजह से विश्‍व में खाद्य आपूर्ति की श्रंख्‍ला टूट गई है।

रूस-यूक्रेन और चीन ताइवान

यूएन की रिपोर्ट बताती है कि इस युद्ध में करीब 8 हजार से अधिक बच्‍चों की मौत हो चुकी है। यूएन की रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि ये संख्‍या इससे कहीं अधिक भी हो सकती है। यूएन के इस सत्र में अमेरिका और रूस के बीच यूक्रेन को लेकर बनी कड़वाहट साफतौर पर दिखाई देगी। ये कड़वाहट केवल रूस को लेकर ही सामने नहीं आएगी बल्कि चीन को लेकर भी सामने जरूर आएगी। वहीं चीन और ताइवान के बीच उभरे तनाव का असर भी इस सत्र पर जरूर दिखाई देगा।

कैसा होगा इन देशों का भाषण

ये सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका-रूस, रूस-यूक्रेन, चीन-अमेरिका, अमेरिका सोलोमन, ईरान-अमेरिका, चीन-ताइवान के बीच जबरदस्‍त तनाव और तल्‍खी व्‍याप्‍त है। इसकी वजह भले ही कुछ भी हो लेकिन ये सत्र इनके बीच घुली कड़वाहट से अछूता नहीं रहेगा। इसलिए इस सत्र में ये देखना काफी दिलचस्‍प होगा कि अमेरिका, चीन, रूस, यूक्रेन, श्रीलंका और पाकिस्‍तान के भाषणों में क्‍या कुछ कहा जाता है। ये केवल एक भाषण मात्र नहीं होंगे बल्कि भविष्‍य के नए संबंधों की आधारशिला के लिए भी काफी खास होंगे।

विश्‍व के कई देशों में मौसम की मार

इसके अलावा इस सत्र में दुनिया के देशों पर पड़ी मौसम की मार का मुद्दा भी हावी जरूर रहेगा। मौसमी मार का असर आने वाले दिनों में न सिर्फ एक देश बल्कि पूरी दुनिया पर दिखाई जरूर देगा। खाद्यान्‍न पैदावार में कमी और अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों में इनकी कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा इस सत्र में जरूर दिखाई देगा। आपको बता दें कि यूरोप, अमेरिका और चीन में पड़ी भीषण गर्मी की वजह से विश्‍व ने क्‍लाइमेट चेंज को पहली बार इतने करीब से देखा है। दुनिया में कहीं बड़ा इलाका जलमग्‍न हो गया है तो कहीं पर भयंकर सूखा पड़ने के आसार हैं। इस बार का ये सत्र कई तरह से चुनौतियों से घिरा हुआ दिखाई देगा।

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Edited By: Kamal Verma

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