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    UNESCO Report: पढ़ाई का नुकसान, विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने की बढ़ी आशंका; जलवायु परिवर्तन शैक्षिक परिणाम को कर रहा बाधित

    Updated: Mon, 15 Jul 2024 07:00 AM (IST)

    वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट (जीईएम) में दावा किया गया है कि जलवायु संबंधी परिवर्तन मसलन गर्मी जंगल की आग बाढ़ सूखा बीमारियां और बढ़ते समुद्री जलस्तर ने शैक्षिक परिणामों पर विपरीत प्रभाव डाला है। इसमें बताया गया है कि अधिकांश निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हर साल जलवायु से संबंधित घटनाओं के कारण स्कूल बंद हो रहे हैं।

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    जलवायु संबंधी परिवर्तन ने शैक्षिक परिणामों पर विपरीत प्रभाव डाला है।

    पीटीआई, नई दिल्ली। जलवायु संबंधी परिवर्तन मसलन गर्मी, जंगल की आग, बाढ़, सूखा, बीमारियां और बढ़ते समुद्री जलस्तर ने शैक्षिक परिणामों पर विपरीत प्रभाव डाला है। इससे हाल के दशक में बनाई गई शैक्षिक बढ़त पर पानी फिरने का खतरा पैदा हो गया है। वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट (जीईएम) में यह दावा किया गया है।

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    वैश्विक रिपोर्ट को यूनेस्को, मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएटिंग क्लाइमेट कम्युनिकेशन एंड एजुकेशन (एमईसीई) और कनाडा के सस्केचेवान विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया गया है। इसमें बताया गया है कि अधिकांश निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हर साल जलवायु से संबंधित घटनाओं के कारण स्कूल बंद हो रहे हैं। इससे पढ़ाई के नुकसान और विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने की आशंका बढ़ रही है।

    दुनिया भर में स्कूल छोड़ने की बढ़ी आशंका

    रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकांश निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हर साल जलवायु से संबंधित घटनाओं के कारण स्कूल बंद हो रहे हैं, जिससे पढ़ाई के नुकसान और विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने की आशंका बढ़ रही है। जलवायु परिवर्तन से संबंधित प्रभाव पहले से ही शिक्षा प्रणालियों और परिणामों को बाधित कर रहे हैं। प्रत्यक्ष प्रभावों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विनाश के साथ-साथ छात्रों, अभिभावकों और स्कूल कर्मचारियों का मौत और चोट की चपेट में आना आदि शामिल हैं।

    प्राकृतिक आपदाओं में छात्रों की हुई मौत

    रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 20 वर्षों में चरम मौसम की कम से कम 75 प्रतिशत घटनाओं में स्कूल बंद कर दिए गए, जिससे 50 लाख या उससे अधिक लोग प्रभावित हुए। बाढ़ और चक्रवात सहित लगातार प्राकृतिक आपदाओं के कारण छात्रों और शिक्षकों की मृत्यु भी हुई है और इसने स्कूल भवनों को भी क्षतिग्रस्त किया।

    इसमें कहा गया है कि 2019 में चरम मौसम की घटनाओं से सबसे अधिक प्रभावित 10 देशों में से आठ निम्न या निम्न-मध्यम आय वाले देश थे। बच्चों के लिए अत्यधिक उच्च जलवायु जोखिम वाले 33 देशों में से 29 को नाजुक देश भी माना जाता है। इनमें करीब एक अरब लोग रहते हैं। इसमें कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन से विस्थापन की आशंका भी बढ़ जाती है और यही एक कारण है कि आंतरिक विस्थापन रिकार्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। वर्ष 2022 के दौरान आपदाओं के कारण 3.26 करोड़ लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए।