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    अवर सचिव व उसके ऊपर के अफसरों को आना होगा दफ्तर, कार्मिक मंत्रालय के दिशा-निर्देश

    By Shashank PandeyEdited By:
    Updated: Thu, 08 Oct 2020 08:31 AM (IST)

    कार्मिक मंत्रालय के दिशा-निर्देश में कहा गया है कि अवर सचिव रैंक से नीचे के कम से कम 50 फीसद कर्मचारियों की दफ्तर में उपस्थिति सुनिश्चित की जाये।लेकिन हर हालात में दो गज की दूरी के नियम का कड़ाई से पालन करना होगा।

    अवर सचिव व उसके ऊपर के अफसरों को आना होगा दफ्तर।

    नई दिल्ली, प्रेट्र। केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने बुधवार को जारी दिशा निर्देश में केंद्र के सभी विभागों में अवर सचिव व उसके ऊपर के अफसरों को सभी कार्य दिवसों पर कार्यालय आना अनिवार्य कर दिया है। कोरोना लॉकडाउन के बाद केंद्र सरकार ने धीरे-धीरे अपना कामकाज बहाल किया और इस दौरान अंतिम आदेश तक उपसचिव और उससे वरिष्ठ रैंक के अधिकारियों को प्रत्येक कार्य दिवस पर दफ्तर आने का निर्देश था।

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    कार्मिक मंत्रालय के दिशा-निर्देश में कहा गया है कि अवर सचिव रैंक से नीचे के कम से कम 50 फीसद कर्मचारियों की दफ्तर में उपस्थिति सुनिश्चित की जाये। उसके मुताबिक, जनहित में आवश्यक होने पर विभागाध्यक्ष 50 फीसद से ज्यादा उपस्थिति भी अनिवार्य कर सकते हैं लेकिन हर हालात में दो गज की दूरी के नियम का कड़ाई से पालन करना होगा।

    अक्षम और भ्रष्ट सरकारी कर्मियों की छंटनी करेगा केंद्र

    कार्मिक मंत्रालय के ताजा आदेश के अनुसार केंद्र सरकार ने सभी विभागों को तीस साल से अधिक का कार्यकाल पूरा कर चुके सभी कर्मचारियों के सर्विस रिकार्ड की समीक्षा करने को कहा है। इसके बाद इनमें से अक्षम और भ्रष्ट कर्मचारियों की पहचान करके उन्हें स्थाई रूप से रिटायर करने को कहा गया है। केंद्र सरकार यह फैसला जनहित में लेना चाहती है।

    केंद्र सरकार के कर्मचारियों की होगी कामकाज की समीक्षा

    कार्मिक मंत्रालय के मुताबिक केंद्र सरकार के कर्मचारियों के कामकाज की समीक्षा सेंट्रल सिविल सर्विस (पेंशन) रूल्स, 1972 के मूलभूत नियम (एफआर) 56 (जे) व 56 (आइ) और 48 (आइ) (बी) के तहत की जाएगी। इससे प्रशासन को एक सरकारी नौकर को पूरी तरह से रिटायर करने का अधिकार मिलता है।

    शुक्रवार को जारी आदेश में कहा गया है कि किसी भी सरकारी अफसर की आयु 50/55 वर्ष होने या उनके सेवाकाल के कम से कम तीस साल पूरे होने के बाद उन्हें किसी भी समय सेवानिवृत्त किया जा सकता है। यह कदम उनके कामकाज और आचरण के आधार पर जनहित में उठाया जाएगा। किसी भी सरकार कर्मचारी को अक्षमता के आधार पर सामान्य रूप से रिटायरमेंट नहीं दिया जाएगा।