अंतत: टूट गया रामनगर पीपा पुल
भाजपाइयों व स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद रविवार आधी रात बाद करीब सवा एक बजे सामने घाट व रामनगर के बीच गंगा पर बना पीपा पुल लोक निर्माण विभाग ने अन्तत: तोड़ दिया। इस दौरान राहगीरों व विभागीय श्रमिकों के बीच झड़प भी हुई। पुल टूटने के बाद गंगा पार करने वालों के लिए अभी लोक निर्माण विभाग ने नि:शुल्क नावों क
वाराणसी। भाजपाइयों व स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद रविवार आधी रात बाद करीब सवा एक बजे सामने घाट व रामनगर के बीच गंगा पर बना पीपा पुल लोक निर्माण विभाग ने अन्तत: तोड़ दिया। इस दौरान राहगीरों व विभागीय श्रमिकों के बीच झड़प भी हुई। पुल टूटने के बाद गंगा पार करने वालों के लिए अभी लोक निर्माण विभाग ने नि:शुल्क नावों का संचालन शुरू नहीं किया है। पीपा पुल फिलहाल न तोड़ने के लिए भाजपा व स्थानीय लोगों ने रामनगर में प्रदर्शन किया। स्थानीय पुलिस और पीडब्ल्यूडी के श्रमिकों ने 66, 67, 68 व 69 नंबर पीपे हटाकर पुल को तोड़ा। इसी के साथ आवागमन थम गया। लोक निर्माण विभाग की ओर से नावों के संचालन का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। इसका कारण है नावों के अधिग्रहण के लिए विभाग की ओर से कोई पहल न किया जाना। पुल तोड़ने का विरोध करने वालों में डा. अनुपम गुप्ता संतोष द्विवेदी, महेश पटेल, जितेंद्र पांडेय, संतोष शर्मा, राकेश मिश्र, तपेश्वर चौधरी आदि शामिल थे।
बढ़ी रामनगर-काशी में दूरी
पीपा पुल हटाए जाने के बाद लंका से रामनगर की वाया सड़क मार्ग दूरी अब ढाई गुना बढ़ गई। दूरी बढ़ने के कारण आटो वाले भी भाव खाने लगे हैं। वहीं लोगों की परेशानी बढ़ गई हैं। अब पांच महीने बाद लोगों के लिए यह पीपा पुल फिर शुरू किया जाएगा।
रेत में कैसे चलेगी बड़ी नाव
भले ही गंगा के पानी में अभी रेत दिख रही हो लेकिन पीडब्लूडी की ओर से मानसून शुरू होने का हवाला देते हुए पीपा पुल तोड़ दिया गया। सवाल उठता है कि जब गंगा में रेत उभर आई है तो बड़ी नावों को संचालन विभाग कैस करेगा। ऐसे में प्राइवेट नाविकों की चांदी कटेगी।
कोढ़ में खाज हुआ पुल निर्माण
रामनगर पीपा पुल तोड़ने व जोड़ने के झंझट से छुटकारे के लिए वर्ष 2006 से ही पक्के पुल का निर्माण हो रहा है। वर्ष 2009 में इसको पूरा करना था लेकिन कतिपय कारणों के चलते अब तक इस पुल का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।
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