नई टिहरी, जेएनएन। तितलियों के संसार देवलसारी में इस बार भी तितली महोत्सव आयोजित होने जा रहा है। मई के प्रथम सप्ताह में यहां चार दिवसीय तितली महोत्सव का आयोजन होगा। इसके लिए देशभर के विभिन्न क्षेत्रों से प्रकृति प्रेमी, प्रसिद्ध फोटोग्राफर और शोध छात्र यहां पहुंचेंगे।देवलसारी पर्यावरण संरक्षण एवं विकास संस्था के साथ ही स्थानीय ग्रामीण भी महोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं। 

तितलियों के लिए देवलसारी प्रसिद्ध है। 15 किमी भूभाग पर फैले देवलसारी में दो सौ के करीब तितलियों और डेढ़ सौ पक्षियों की प्रजाति पाई जाती है। एक ओर जहां कई स्थानों पर तितलियों की प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं, वहीं देवलसारी में तितलियों का खूबसूरत संसार मौजूद है। इसे देखते हुए पिछले साल देवलसारी पर्यावरण संरक्षण एवं विकास संस्थान व स्थानीय युवाओं ने तितली महोत्सव की शुरुआत की।

इस बार भी महोत्सव के आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं। देवलसारी जिला मुख्यालय से करीब 85 किमी की दूरी पर चंबा-मसूरी मार्ग पर स्थित है। यहां छोटे वाहनों से पहुंचा जा सकता है। पर्यटकों के रुकने के लिए यहां छोटे-छोटे हट बनाए गए हैं। गर्मियों में बड़ी संख्या में पर्यटक और छात्रों का दल यहां की जैव विविधता को देखने पहुंचता है। स्थानीय लोगों  का कहना है कि यहां पाए जाने वाले पौधे भी तितलियों के अनुकूल हैं। यहां उड़ने वाली गिलहरी भी पाई जाती है।

यह हैं तितलियों की प्रजातियां 

कॉमन पिकॉक, सिल्वर ग्रे, सिल्वर लाइन, ब्ल्यू पेल जस्टर, स्केटली नबाब, ग्रेट ब्लैक विन, यलो पैंजी, वाटर हियर स्ट्रेक, हिज ब्ल्यू, कॉमन नबाब । मसूरी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी कहकशा नसीम ने बताया कि देवलसारी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसे देखते हुए सरकार ने क्षेत्र को ईको टूरिज्म ग्रोथ सेंटर के लिए चुना है। यहां विभिन्न प्रकार की तितलियां पाई जाती हैं। यह स्थान देवदार और बांज के जंगल के बीच स्थित है। 

पर्यावरण संरक्षण एवं विकास संस्था के निदेशक अरुण गौड़ का कहना है कि देवलसारी तितलियों के लिए प्रसिद्ध होने के साथ-साथ पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसे पहचान दिलाने के लिए पिछले साल तितली महोत्सव की शुरुआत की गई। इस बार भी महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। 

Edited By: Tanisk

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट