नई दिल्ली (जेएनएन)। स्वादिष्ट भोजन में खाद्य तेल जिन्हें आज आम तौर पर कुकिंग ऑइल कहा जाता है इसकी बड़ी भूमिका होती है। आज लोग अपनी पसंद के अनुसार, कई तरह के अलग-अलग कुकिंग ऑइल का इस्तेमाल करते हैं। ये कहना गलत नहीं होगा कि इन उत्पादों के लुभावने और स्वस्थ जीवन का वादा करने वाली विज्ञापनों से वे इनकी तरफ आकर्षित होते हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी कि कुकिंग ऑइल का पहला विज्ञापन 1950 में किया गया था। उस दौरान पहली बार किसी कुकिंग ऑइल का प्रचार पारंपरिक घी से बेहतर बताकर किया गया था। इससे लोगों में इसके प्रति उत्सुकता बढ़ी और लोगों ने इसे खरीद कर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया और अगर आप आज के दौर में लोगों के घर में जो कुकिंग ऑइल देखेंगे वो उसी ऑइल के अलग-अलग रूप हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है कि जितना बढ़ा-चढ़ा कर इनकी खूबियों के बारे में बताया जाता है सच्चाई उतनी भयावह है। जानते हैं इन मार्केट में उपलब्ध इन कुकिंग ऑइल की असलियत के बारे में...

क्या वेजीटेबल्स ऑइल उतने ही पौष्टिक हैं जितने वे बताए जाते हैं

अध्ययन से ये बात सामने आई है कि सनफ्लॉर (सूरजमुखी का तेल), कनोला (सफेद सरसों का तेल) और कॉटनसीड (कपास के बीज का तेल) जैसे स्वास्थ्यवर्धक कहे जाने वाले कुकिंग ऑइल अमेरिका में कई घातक बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि कोई छोटी-मोटी बीमारी नहीं बल्कि इनसे दिल की बीमारी और कई प्रकार के कैंसर भी हो सकते हैं।

कॉटनसीड ऑइल (कपास) असल में एक बचा-खुचा अपशिष्ट है

इन पर अध्ययन किये गए एक किताब में दिए गए हैप्पीनेस डाइट के तहत उल्लेख किया गया है कि किस तरह इस प्रकार के विज्ञापन ग्राहकों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे हैं और उन्हें बीमारियों के गर्त में ढकेल रहे हैं। सबसे पहले तो वे बड़े-बड़े वादे कर के अपने इन उत्पादों को बेचते हैं। दूसरा, उनके तेल उत्पादन ने कपास के तेल के रूप में अपशिष्ट (अंत में बचने वाला राख) पैदा किया है। पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि कैसे अपशिष्ट उत्पाद को 'पौष्टिक' तेल के विकल्प के रूप में बेचा गया था, जबकि इसमें कोई पौष्टिक कारक मौजूद नहीं है।

वनस्पति तेल (वेजीटेबल ऑइल) भी एक तरह का घातक अपशिष्ट 

यहां तक कि वनस्पति तेल जिसे वेजिटेबल ऑइल कहा जाता है वह भी एक प्रकार अपशिष्ट है। 'साइंस मंथली' में प्रकाशित एक लेख में बताया गया है कि कैसे न केवल कपास का तेल बल्कि बड़े पैमाने पर वनस्पति तेल भी पहले एक प्रकार का कचरा था। यह केवल मार्केटिंग है जिसने इन्हें पौष्टिक और हेल्दी तेलों में बदल दिया है।

वनस्पति तेल अक्सर ट्रांस वसा में बदल जाते हैं

अक्सर इन वनस्पति तेलों को हाइड्रोजनीकरण प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इससे ट्रांस वसा का गठन होता है। ट्रांस वसा वास्तव में अस्वास्थ्यकर हैं जो यकृत के रोग, मधुमेह, मोटापा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारी और यहां तक कि कैंसर जैसे विकारों में योगदान देते हैं। इतना ही नहीं ट्रांस फैट महिलाओं के लिए स्तन कैंसर, कोलोन कैंसर सहित कई अन्य प्रकार के कैंसर का कारण बनते हैं। इन तेलों निर्माण प्रक्रिया के तहत उनका ऑक्सीकरण किया जाता है जिसके कारण इसकी प्रकृति और घातक हो जाती है। 

 

सवाल उठता है इसके बजाय क्या उपयोग करें?

जब ये सारे तेल स्वास्थ्य के लिए इतने घातक हैं फिर सवाल उठता है कि खाने में क्या इस्तेमाल किया जाए। आपको बता दें कि इसके विकल्प के लिए सर्वश्रेष्ठ मक्खन है जिसका उपयोग किया जा सकता है। साथ ही इसके अलावा नारियल का तेल और खजूर का तेल, गाय का देसी घी, सरसों का तेल, तिल का तेल, मूंगफली का तेल भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है।  

मूंगफली के तेल के फायदे
मूंगफली का तेल शरीर में वसा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे आपको अपना वजन कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा इसमें इसमें फैटी एसिड, असंतुलित मात्रा में नहीं होता, जिसके कारण शरीर में फैट अधिक नहीं बढ़ता।

Posted By: Srishti Verma