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न्यायपालिका के सामने असली चुनौती जिला अदालतों के स्तर पर, CJI बोले- मनोरंजक गतिविधियों में भाग लें जज

Published: Sun, 30 Nov 2025 06:36 AM (GMT+05:30)

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका के सामने असली चुनौती जिला अदालतों के स्तर ...और पढ़ें

चीफ जस्टिस सूर्यकांत बोले- मध्यस्थता इस पेशे का मजबूत स्तंभ बनती जा रही (फोटो- एक्स)

चीफ जस्टिस सूर्यकांत बोले- मध्यस्थता इस पेशे का मजबूत स्तंभ बनती जा रही (फोटो- एक्स)

HighLights

  1. चीफ जस्टिस सूर्यकांत बोले- मध्यस्थता इस पेशे का मजबूत स्तंभ बनती जा रही 

  2. जजों का कामकाज लंबा और तनावपूर्ण होता है, उन्हें मनोरंजक गतिविधियों में भाग लेना चाहिए

पीटीआई,नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका के सामने असली चुनौती जिला अदालतों के स्तर पर है, जो न्याय चाहने वाले अधिकांश नागरिकों के लिए संपर्क का पहला पड़ाव हैं।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में सीजेआइ ने कहा कि किसी भी व्यवस्था की पहली चिंता यह होती है कि जिला अदालत वादियों को न्याय दिलाने में सक्षम हो।

उन्होंने कहा- 'भारतीय न्यायपालिका के सामने असली चुनौती जमीनी स्तर पर है। जिला न्यायपालिका कितनी तेजी, मानवीयता और बुद्धिमत्ता से काम करती है और कितनी स्वतंत्रता और निडरता से न्याय प्रदान करती है, यह संपूर्ण न्यायिक ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण घटक है।'

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि 70 प्रतिशत वादी जिला स्तर पर ही अपना भाग्य तय किए जाने की उम्मीद करते हैं।वैकल्पिक विवाद समाधान की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि यह पुरानी गलत धारणा है कि मध्यस्थता का न्यायपालिका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, इसे अब कोई भी स्वीकार नहीं करता।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा-'मध्यस्थता इस पेशे का एक मजबूत स्तंभ बनती जा रही है। मुझे एहसास हुआ कि मध्यस्थता एक ऐसा सक्षम हथियार है, जो भारत में भी सफलता की कई कहानियां लिख सकता है।'उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे में युवाओं की अच्छी संख्या को बनाए रखने की जरूरत है।

उधर, ऑल इंडिया जज बैडमिंटन चैंपियनशिप के उद्घाटन समारोह में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायाधीशों के काम के घंटे लंबे होते हैं। साथ ही उनका काम भी बहुत तनावपूर्ण होता है। इसलिए खुद को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए उन्हें मनोरंजक गतिविधियों में भाग लेना चाहिए।

साथ ही इसे अपनी आदत में शुमार कर लेना चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा कि हाई कोर्ट जज इस प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं। इससे पता चलता है कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति बेहद सचेत हैं।