नई दिल्ली, जेएनएन। शरीर को बैक्टीरिया संक्रमण से बचाने के लिए विज्ञानियों ने टॉरिन नाम के एक पोषक तत्व की पहचान की है। यह ना केवल आंत को संक्रमण से बचाता है बल्कि क्लेबसिएला निमोनिया जैसे हमलावर बैक्टीरिया को भी मारता है। यह अध्ययन जर्नल सेल में प्रकाशित हुआ है और पोषक तत्व की पहचान करने में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के पांच विज्ञानियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अध्ययन में कहा गया है कि आंत में मौजूद माइक्रोबायोटा बैक्टीरिया के संक्रमण से बचा सकते हैं, लेकिन इस बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं कि ये कैसे सुरक्षा प्रदान करते हैं।

बता दें कि माइक्रोबायोटा न केवल हमारे पाचन तंत्र को सेहतमंद रखते हैं, बल्कि पूरे शरीर के स्वास्थ में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं, इनके असामान्य होने पर पाचन और अन्य गंभीर रोग उत्पन्न होने लगते हैं। विज्ञानी एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते उपयोग के विकल्प के तौर पर माइक्रोबायोटा का अध्ययन कर रहे हैं, क्योंकि ये दवाएं ना केवल इन्हें नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि कम प्रभावी भी होती हैं। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि बैक्टीरिया पर दवाओं का प्रभाव बहुत देरी से होता है।

शोध के दौरान विज्ञानियों ने डेल्टाप्रोटोबैक्टीरिया नामक बैक्टीरिया के एक वर्ग की पहचान की जो संक्रमण से लड़ने में कारगर है। आगे के विश्लेषण ने उन्हें डेल्टाप्रोटोबैक्टीरिया गतिविधि के उत्प्रेरक के तौर पर टॉरिन की पहचान करने के लिए प्रेरित किया। टॉरिन शरीर में मौजूद वसा और तेल को पचाने में मदद करता है और आंत में मौजूद बाइल एसिड में पाया जाता है। जहरीली गैस हाइड्रोजन सल्फाइड टॉरिन का बाइप्रोडक्ट है। विज्ञानियों का कहना है कि अगर टॉरिन की मात्रा कम है तो संक्रमण की गुंजाइश रहती है, लेकिन अगर इसकी मात्रा अधिक है तो इससे निकलने वाली हाडड्रोजन सल्फाइड संक्रमण से बचाती है। एएनआइ

Edited By: Neel Rajput

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