Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Indian Army Tank Killers & Spike: इस मिसाइल से नहीं बच सकेंगे दुश्‍मन के टैंक

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Fri, 04 Oct 2019 02:50 PM (IST)

    Indian Army Tank Killers Spike पाक से बढ़ते खतरे के मद्देनजर सेना को मजबूत करने की कवायद जोरों पर है।

    Indian Army Tank Killers & Spike: इस मिसाइल से नहीं बच सकेंगे दुश्‍मन के टैंक

    नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। Indian Army Tank Killers & Spike: भारत में पाकिस्‍तान से हमले की आशंका के मद्देनजर भारत इसका जवाब देने की तैयारी में जी-जान से जुटा है। इसी के तहत सेना को अत्‍याधुनिक बनाने की कवायद चल रही है। बात चाहे इस माह आने वाले राफेल लड़ाकू विमानों की हो या हाल ही में नौसेना में शामिल हुई पनडुब्‍बी आईएनएस खंडेरी (INS Khanderi) हो या फिर रूस से मिलने वाली एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम (S400 Missile Defence System), सभी इसकी ही एक कड़ी हैं। अब इसी कड़ी में सेना को स्‍पाइक (Spike) की भी ताकत मिलने वाली है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    स्‍पाइक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल

    स्‍पाइक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (Spike anti-tank guided missiles/ ATGMs) है। यह इजराइल की मिसाइल है जिसको भारत में डीआरडीओ (DRDO) तैयार कर रहा है। अगले दस दिनों में इसकी पहली खेप मिलने के साथ ही यह भारतीय सेना का हिस्‍सा बन जाएगी। स्‍पाइक को टैंक किलर (Tank killers) भी कहा जाता है। इसका सीधा सा अर्थ है कि इसके अचूक निशाने से कोई टैंक बच नहीं सकता है। आपको बता दें कि लड़ाई के दौरान टैंकों का इस्‍तेमाल ज्‍यादातर प्‍लेन इलाकों में आमने सामने की जंग के दौरान होता है। लेकिन, ये दुश्‍मन पर बेहद घातक साबित होते हैं। ऐसे में दुश्‍मन के टैंकों को ध्‍वस्‍त करने और इनके परखच्‍चे उड़ाने में स्‍पाइक मिसाइल का कोई जवाब नहीं है।

    पश्चिमी सीमा संवेदनशील

    भारत की ही बात करें तो पाकिस्‍तान से लगती पश्चिमी सीमा काफी संवेदनशील मानी जाती है। 1971 में इस पश्चिमी सीमा ने जंग को करीब से देखा भी है। स्‍पाइक मिसाइल के सेना (Spike Missile induct in Indian Army) में शामिल हो जाने के बाद भारतीय सेना की ताकत काफी बढ़ जाएगी। पहले चरण में करीब 210 मिसाइलें सेना को सौंपी जाएंगी। इसके अलावा इसमें इस मिसाइल को दागने वाले लॉन्‍चर भी शामिल होंगे। इसका डिजाइन इजरायल की राफेल एडवांस्‍ड डिफेंस सिस्‍टम (Rafale advance stage system of Israel) ने तैयार किया है।

    बालाकोट में स्‍पाइक बम का इस्‍तेमाल

    पाकिस्‍तान से हमले की आशंका के मद्देनजर इस मिसाइल की पहली खेप मिलना काफी सुखद है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि पाकिस्‍तान के बालाकोट में एयर स्‍ट्राइक के दौरान इजराइल के स्‍पाइक बमों (Spike Bomb used in Balakot Air Strike) का इस्‍तेमाल किया गया था। इन्‍हें भी इजरायल से हासिल किया गया था औरये मिराज 2000 लड़ाकू विमान (Mirag 2000 Fighter jet) से गिराए गए थे। जहां तक स्‍पाइक मिसाइल की बात है तो आपको बता दें कि इसकी मारक रेंज करीब चार किमी. तक है। स्‍पाइक के अलावा मैन-पोर्टेबल एटीजीएम (Man Portable Anti-Tank Guided Missile/MP-ATGM) को भी डीआरडीओ विकसित कर रहा है। हालांकि, ये 2020 से पहले सेना में शामिल नहीं हो सकेंगी। इनका फिलहाल ट्रायल चल रहा है।

    परीक्षण के दौर से गुजर रही मिसाइल

    पिछले माह ही आंध्र प्रदेश के कुरनूल रेंज में इसका सफल टेस्‍ट किया जा चुका है। लेकिन, सेना को सौंपने से पहले अभी इन्‍हें और कड़ी परीक्षा से गुजरना होगा। यह थर्ड जनरेशन की मिसाइल (3rd Generation Missile) हैं। इनकी मारक रेंज करीब ढाई किमी. है। इनकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह टार्गेट को ध्‍वस्‍त करने से पहले उसकी इंफ्रारेड इमेज (Infrared Image) तैयार करती है। इसकी लैंथ और इसका डायामीटर करीब  1,300 mm/ 120 mm है। 14.5 किमी. वजनी इस मिसाइल का लॉन्‍चर भी करीब इतना ही वजनी है। टॉप अटैक कैपेबिलिटी (Top Attack Capability) से युक्‍त यह मिसाइल बेहद खास है। भारत की नाग मिसाइल (Nag Anti Tank Missile) इसका ही एक प्रकार है। 2018 से लेकर अब तक इसके करीब तीन टेस्‍ट किए जाचुके हैं। लेबनान, अफगानिस्‍तान और गाजा में इसका इस्‍तेमाल किया जा चुका है।

    पाइपलाइन में ये भी

    पाकिस्‍तान और चीन से खतरे और सीमा विवाद को देखते हुए भारत लगातार सेना को मजबूत करने में जुटा है। स्‍पाइक के अलावा दूसरी जनरेशन की मिलान-2टी (Milan 2T) और कॉनकर्स एंटी टैंक मिसाइल (Concurse Anti Tank Missile) को भी तैयार किया जा रहा हे। मिलान की रेंज जहां दो किमी तक है वहीं कॉनकर्स की रेंज चार किमी. है। इन दोनों को ही भारत डायनामिक्‍स लिमिटेड (Bharat Dynamics Limited) फ्रांस और रूस की कंपनी के लाइसेंस के बिनाह पर बना रहा है। डीआरडीओ जिन एंटी टैंक मिसाइलों को सेना तैयार के लिए तैयार कर रहा है उनके लिए एक शब्‍द बड़ा प्रचलित है, वो है छोड़ो और भूल जाओ (fire-and-forget anti-tank guided missile)।  

    कई देशों के पास हैं ये मिसाइल

    एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल की ही बात करें तो तो अमेरिका के पास वर्तमान में FGM-148 Javelin, रूस की सेना के पास  9M133 Kornet, जर्मनी की आर्मी के पास PARS 3 LR, ब्रिटेन के पास Brimstone missile इसी श्रेणी की एंटी टैंक मिसाइल हैं। 

    जम्‍मूू कश्‍मीर में बढ़ती सैलानियों की संख्‍या, केंद्र पर सवाल उठाने वालों पर है तमाचा 

    जानें आखिर क्‍या है पाकिस्‍तान के आतंकियों का Moon Mission और क्‍या है उनकी प्‍लानिंग 

    बेवजह नहीं है रक्षा मंत्री राजनाथ की चिंता, पश्चिमी तट हर लिहाज से है भारत के लिए बेहद खास