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    इस्कॉन के संपत्ति विवाद मामले में आज फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट, लंबे समय से चल रहा है केस

    जस्टिस एएस. ओका और जस्टिस आगस्टिन जार्ज मसीह की पीठ ने पिछले साल 24 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार जस्टिस ओका शुक्रवार को सुबह 1030 बजे फैसला सुनाएंगे। इस्कॉन बेंगलुरु ने दो जून 2011 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसमें उसने 23 मई 2011 के हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

    By Agency Edited By: Jeet Kumar Updated: Fri, 16 May 2025 06:54 AM (IST)
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    इस्कॉन के संपत्ति विवाद मामले में आज फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट (फोटो- एएनआई)

    पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को इस्कॉन बेंगलुरु की एक याचिका पर फैसला सुनाने की संभावना है, जिसमें कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसने लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद में इस्कॉन मुंबई के पक्ष में निर्णय दिया था। यह विवाद बेंगलुरु के प्रसिद्ध हरे कृष्ण मंदिर और शैक्षणिक परिसर के नियंत्रण को लेकर है।

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    साढ़े दस बजे आएगा फैसला

    जस्टिस एएस. ओका और जस्टिस आगस्टिन जार्ज मसीह की पीठ ने पिछले साल 24 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, जस्टिस ओका शुक्रवार को सुबह 10:30 बजे फैसला सुनाएंगे। इस्कॉन बेंगलुरु ने दो जून, 2011 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उसने 23 मई, 2011 के हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

    वन भूमि की स्थिति की जांच के लिए एसआइटी गठित करें : सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी राज्यों को यह पता लगाने के लिए एसआइटी गठित करने का निर्देश दिया कि क्या कोई आरक्षित वन भूमि गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए निजी क्षेत्र को आवंटित की गई है।

    भूमि वन विभाग को सौंपने का निर्देश

    प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई, जस्टिस आगस्टीन जार्ज मसीह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को ऐसी भूमि का कब्जा वापस लेने और उसे वन विभाग को सौंपने का भी निर्देश दिया है।

    भूमि का कब्जा वापस लेना व्यापक जनहित में नहीं होगा

    पीठ ने कहा कि यदि यह पाया जाता है कि भूमि का कब्जा वापस लेना व्यापक जनहित में नहीं होगा, तो सरकारों को उक्त भूमि की कीमत उन व्यक्तियों, संस्थाओं से वसूलनी चाहिए, जिन्हें वह भूमि आवंटित की गई है। वसूली से प्राप्त राशि का इस्तेमाल वनों के विकास के लिए करना चाहिए।

    पीठ ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र-शासित प्रदेशों के प्रशासकों को विशेष टीम गठित करने का भी निर्देश दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसे सभी हस्तांतरण आज से एक साल के भीतर हो जाएं।

    पौधारोपण के लिए किया जाना चाहिए भूमि का इस्तेमाल

    पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसी भूमि का इस्तेमाल केवल पौधारोपण के लिए किया जाना चाहिए। शीर्ष न्यायालय ने पुणे में आरक्षित वन भूमि से जुड़े मामले में दिए गए फैसले में यह निर्देश जारी किया।

    'वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र को रोकने के लिए सख्त रुख की जरूरत'

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि बड़े पैमाने पर शहरीकरण के कारण वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र में गिरावट को देखते हुए वनस्पतियों और जीवों के लिए खतरा पैदा हो गया है। इसके लिए दोषियों को सजा दिलाने के लिए अधिकारियों को सख्त रुख अपनाने की जरूरत है।

    हालांकि, जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि किसी आरोपित के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकारों के किसी भी तरह के उल्लंघन का तभी समर्थन किया जाना चाहिए जब अभियोजन पक्ष मानकों को पूरा करता हो।

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