गिरीश हत्याकांड: दया याचिका के लिए दोषियों की सजा 8 हफ्ते के लिए निलंबित; सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी शुभा को लेकर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के गिरीश हत्याकांड में शुभा शंकर की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है। अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण दिखाते हुए दोषियों को राज्यपाल के समक्ष दया याचिका दायर करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने दोषियों की सजा को 8 हफ्तों के लिए निलंबित कर दिया है और राज्यपाल से परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने का आग्रह किया है।

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2003 में एक साफ्टवेयर इंजीनियर की हत्या के लिए उसकी मंगेतर समेत चार दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने उन्हें राज्यपाल के समक्ष क्षमादान के लिए गुहार लगाने की अनुमति दे दी।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि दोषियों ने युवा अवस्था में अपराध किया था। अब वे अधेड़ उम्र के हो चुके हैं। इसके बावजूद विभिन्न कारणों से हम हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखने के इच्छुक हैं।
लड़की ने प्रेमी के साथ मिलकर मंगेतर की हत्या की
इस मामले में 30 नवंबर, 2003 को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बीवी गिरीश की शुभा से सगाई हुई थी। तीन दिसंबर को उसकी हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने आरोप लगाया कि शुभा और तीन अन्य दोषियों अरुण वर्मा, वेंकटेश और दिनेश ने सगाई के दो दिन बाद गिरीश की हत्या की साजिश रची। शुभा ने अपने प्रेमी अरुण और अन्य दोषियों के साथ मिलकर गिरीश को मार डाला।
अदालत ने चारों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा
दरअसल, जब शुभा के पिता को उसके प्रेम संबंधों का पता चला, तो उन्होंने बेटी की अनिच्छा के बावजूद उसका विवाह तय कर दिया। तीन दिसंबर को शुभा ने गिरीश से रात के खाने पर होटल ले जाने के लिए कहा और उसे हवाई अड्डे के पास अपना स्कूटर रोककर हवाई जहाज उतरते देखने के लिए कहा। इसी दौरान उसकी हत्या कर दी गई। निचली अदालत ने चारों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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