नई दिल्‍ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करेगा। मालूम हो कि महाराष्ट्र सरकार और उसके पूर्व गृह मंत्री देशमुख ने पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई से जांच कराने के बॉम्‍बे हाई कोर्ट के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने अपने 52 पन्नों के आदेश में कहा था कि देशमुख के खिलाफ सिंह के आरोपों ने महाराष्‍ट्र पुलिस में नागरिकों के यकीन को डिगाने का काम किया है। 

मालूम हो कि पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह ने 25 मार्च को बॉम्‍बे हाई कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में देशमुख के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की थी। परम बीर सिंह ने दावा किया था कि देशमुख ने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाझे समेत अन्य अधिकारियों से बार और रेस्तराओं से 100 करोड़ रुपए की वसूली करने को कहा था। याचिका पर हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने कहा कि यह असाधारण मामला है जिसमें स्वतंत्र और निष्‍पक्ष जांच की जरूरत है। 

तीन जनहित याचिकाओं और एक आपराधिक रिट याचिका पर अपना फैसला देते हुए बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने कहा था कि मामले में स्वतंत्र एजेंसी की जांच नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा और लोगों में यकीन पैदा करने के लिए जरूरी है। इसके साथ ही अदालत ने भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई से जांच कराने का आदेश दे दिया था। बॉम्‍बे हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद विदर्भ के अनुभवी नेता देशमुख ने राज्य सरकार से इस्तीफा दे दिया था। बीते मंगलवार को इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। 

इस बीच सीबीआई ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए प्राथमिक जांच दर्ज कर ली है। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक सीबीआइ की एक टीम मंगलवार दोपहर मुंबई पहुंची और सभी संबंधित दस्तावेज जमा किए। अधिकारियों की मानें तो बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने आरोपों की प्राथमिक जांच करने के लिए सोमवार को सीबीआई को 15 दिन का समय दिया था।

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