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    'ये अमानवीय और अवैध...', प्रयागराज में बुलडोजर कार्रवाई पर SC सख्त; 10-10 लाख का मुआवजा देने का निर्देश

    By Agency Edited By: Mahen Khanna
    Updated: Tue, 01 Apr 2025 02:57 PM (IST)

    SC on demolitions in Prayagraj प्रयागराज में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम न्यायालय ने यूपी सरकार और प्रयागराज विकास प्राधिकरण को फटकार लगाई है। कोर्ट ने इसे अमानवीय और अवैध बताया। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि देश में कानून का शासन है और नागरिकों के आवासीय ढांचों को इस तरह से नहीं ढहाया जा सकता। कोर्ट ने इसी के साथ प्राधिकरण को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।

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    SC on demolitions in Prayagraj सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी।

    पीटीआई, नई दिल्ली। प्रयागराज में घरों पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। सुप्रीम न्यायालय ने यूपी सरकार और प्रयागराज विकास प्राधिकरण को फटकार लगाते हुए इस कार्रवाई को 'अमानवीय और अवैध' बताया।

    देश में कानून का राज, ऐसा नहीं चलेगा

    तोड़फोड़ की कार्रवाई "अमानवीय" करार देते हुए जस्टिस अभय एस ओका और उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि देश में कानून का शासन है और नागरिकों के आवासीय ढांचों को इस तरह से नहीं ढहाया जा सकता।

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    पीठ ने कहा, 

    इस कार्रवाई ने हमारी अंतरात्मा को झकझोर दिया है। आश्रय का अधिकार, कानून की उचित प्रक्रिया जैसी कोई चीज होती है।"

    10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश 

    शीर्ष अदालत ने प्राधिकरण को छह सप्ताह के भीतर प्रत्येक घर के मालिकों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। अदालत ने पहले प्रयागराज में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना तोड़फोड़ की कार्रवाई को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई थी और कहा था कि इससे गलत संकेत गया है।

    वकील का दावा- अतीक अहमद की जमीन समझ किया ध्वस्त

    उधर, याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि राज्य सरकार ने गलत तरीके से मकानों को ध्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह सोचकर इसे ध्वस्त किया कि यह जमीन गैंगस्टर-राजनेता अतीक अहमद की है, जो 2023 में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।

    शीर्ष अदालत अधिवक्ता जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद और अन्य लोगों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनके मकान ध्वस्त कर दिए गए थे।

    इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस विध्वंसक कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ताओं को कथित तौर पर प्रयागराज जिले के लूकरगंज में कुछ निर्माणों के संबंध में 6 मार्च 2021 को नोटिस दिया गया था।