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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 02, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों के प्रशासन में सरकारी कर्मियों की प्रतिनियुक्ति पर तमिलनाडु सरकार के मांगा जवाब

By AgencyEdited By: Amit Singh
Published: Sun, 02 Oct 2022 04:30 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में मंदिरों के प्रशासन के लिए सरकारी कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति का आरोप लगाने वाली याचिका पर ...और पढ़ें

मंदिरों के प्रशासन में सरकारी कर्मियों की प्रतिनियुक्ति पर तमिलनाडु नोटिस
मंदिरों के प्रशासन में सरकारी कर्मियों की प्रतिनियुक्ति पर तमिलनाडु नोटिस

नई दिल्ली, प्रेट्र: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में मंदिरों के प्रशासन के लिए सरकारी कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति का आरोप लगाने वाली याचिका पर तमिलनाडु सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमा कोहली की पीठ ने तमिलनाडु सरकार को छह सप्ताह के अंदर नोटिस का जवाब देने को कहा है। इस बीच, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि एक और हलफनामा दायर किया जाएगा जिसमें तमिलनाडु राज्य में मंदिरों की संख्या का संकेत दिया जाएगा जहां कोई ट्रस्टी नियुक्त नहीं किया गया है। सरा मंदिरों की संख्या जिनमें सरकारी अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है।

पीठ ने कहा है कि शुरुआत में, याचिकाकर्ता टीआर रमेश की ओर से वैद्यनाथन ने पक्ष रखते हुए कहा कि तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 की धारा 55 (1) के अनुसार, केवल मंदिर के ट्रस्टी ही मंदिरों के प्रशासन के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण एक दशक से अधिक समय से ट्रस्टियों की नियुक्ति नहीं हुई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार, कार्यकारी अधिकारियों के अलावा सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति कर रही है, जिन्हें पहले से ही मंदिरों का प्रशासन सौंपा जा चुका है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों को संविधान की प्रस्तावना को सार्वजनिक स्थानों और सरकारी कार्यालयों में स्थानीय भाषाओं में प्रदर्शित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एएस ओका की पीठ ने कहा कि कुछ चीजें हैं, जिन्हें सरकार पर छोड़ना होगा। पीठ ने कहा, 'कुछ लोग वास्तव में उद्यमी हैं। निर्वाचित हो जाइए और ऐसा कीजिए। इसके लिए यह जगह नहीं है।'                                                    

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