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    'दागी उम्मीदवारों को क्यों नहीं हटाया? सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार से पूछे कई सवाल

    सुप्रीम कोर्ट ने आज कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई की। कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल में सरकारी और वित्त-पोषित स्कूलों में 25 हजार से अधिक शिक्षकों और गैर कर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार से यह भी पूछा कि अतिरिक्त पदों को बनाने का क्या उद्देश्य था।

    By Jagran News Edited By: Abhinav Tripathi Updated: Thu, 19 Dec 2024 11:30 PM (IST)
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    सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार से पूछे कई सवाल (फोटो- जागरण)

    पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बंगाल सरकार से पूछा कि क्या उन्होंने कथितरूप से अवैध नियुक्ति किए जाने वाले लोगों को निकालने की बजाय शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की अतिरिक्त भर्ती के लिए पद क्यों बनाए? प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने बंगाल सरकार से पूछा कि इन अतिरिक्त पदों को बनाने का क्या उद्देश्य था।

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    बंगाल सरकार ने क्या दिया जवाब

    इस पर बंगाल सरकार की तरफ से पेश वकील राकेश द्विवेदी ने बताया कि यह कदम चयन प्रक्रिया की पूर्ण जांच के लिए नियुक्त समिति द्वारा जारी रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया था। पीठ ने पाया कि समिति की रिपोर्ट में कुछ अनियमितताएं थीं। द्विवेदी ने पक्ष रखा कि समिति ने कुछ अनियमितताएं तो पाई थीं, लेकिन उतनी ज्यादा नहीं जितनी सीबीआई की रिपोर्ट में थीं।

    इस पर पीठ ने कहा, "इसका मतलब यह हुआ कि उन्होंने (समिति) अनियमितताओं का होना पाया था। तो, ऐसे हालात से निपटने के लिए, अवैध रूप से नियुक्त किए गए लोगों को निकालने की बजाय अतिरिक्त पद बना दिए गए। आप एक बात बताएं कि अगर आपको अनियमितताएं मिलेंगी, तो क्या आप उन्हें पहले निकालेंगे नहीं।"

    हाईकोर्ट ने नियुक्ति को अवैध बताया था

    द्विवेदी ने कहा कि आदेश में यह विशेषरूप से कहा गया था कि नियुक्ति प्रतीक्षा-सूची के उम्मीदवारों से की जानी है। पीठ ने कहा कि बिल्कुल सही। क्योंकि कारण यह है कि आप दागी उम्मीदवारों को हटाना ही नहीं चाहते थे। सुप्रीम कोर्ट, कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिसमें हाई कोर्ट ने बंगाल में सरकारी और वित्त-पोषित स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध करार दिया था।

    हाई कोर्ट ने पाया था कि 19 मई 2022 को बंगाल सरकार ने प्रतीक्षा-सूची के उम्मीदवारों को नौकरी देने के लिए 6,861 अतिरिक्त पदों को निकालने का आदेश जारी किया था। बीती सात मई को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी और सीबीआई को मामले की जांच जारी रखने को कहा था। अब मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2025 में होगी।

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