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    विधायकों की अयोग्यता पर फैसले में देरी नहीं कर सकते राज्यपाल : सुप्रीम कोर्ट

    By TaniskEdited By:
    Updated: Tue, 09 Nov 2021 07:59 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मणिपुर के राज्यपाल लाभ के पद के मुद्दे पर भाजपा के 12 विधायकों की अयोग्यता पर चुनाव आयोग द्वारा की गई सिफारिश को लेकर निर्णय में देरी नहीं कर सकते ।

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    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विधायकों की अयोग्यता पर फैसले में देरी नहीं कर सकते राज्यपाल।

    नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि 'लाभ के पद' मामले में भारतीय जनता पार्टी के 12 विधायकों को अयोग्य घोषित करने के संबंध में निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए विचारों को मणिपुर के राज्यपाल इस तरह दबा नहीं सकते हैं। न्यायमूर्ति एल नागेश्र्वर राव, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्‍‌ना की पीठ को जब बताया गया कि निर्वाचन आयोग से 13 जनवरी, 2021 को मिली राय पर राज्यपाल ने अभी तक कोई फैसला नही लिया है, पीठ ने उक्त बात कही। पीठ ने कहा, 'निर्वाचन आयोग ने सलाह दे दी है। राज्यपाल आदेश पारित क्यों नहीं कर सकते हैं? सरकार को राज्यपाल से पूछना चाहिए। कुछ किया जाना चाहिए।

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    निर्वाचन आयोग इस संबंध में अपनी राय जनवरी में ही दे चुका है। राज्यपाल इस फैसले को यूं दबाकर नहीं बैठ सकते हैं।' शीर्ष अदालत कारोंग से विधायक डीडी थाईसी और अन्य द्वारा 12 विधायकों को अयोग्य घोषित करने संबंधी मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। राज्य सरकार के वकील ने सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि सालिसिटर जनरल दूसरी पीठ के समक्ष एक अन्य मामले में बहस कर रहे हैं। इस पर न्यायालय ने इसकी सुनवाई 11 नवंबर के लिए स्थगित कर दी। मणिपुर से भाजपा के 12 विधायकों पर 2018 में 'लाभ के पद' मामले में संसदीय सचिव के पद पर आसीन होने की वजह से अयोग्यता की तलवार लटकी है। इस मामले में राज्यपाल ने पिछले साल अक्टूबर में निर्वाचन आयोग की राय मांगी थी।

    जानें- क्या है मामला

    शीर्ष अदालत कांग्रेस विधायक डीडी थैसी की एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें भाजपा के 12 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि ये विधायक संसदीय सचिव का पद धारण कर रहे थे, जो लाभ के पद के बराबर था।

    राज्य सरकार के वकील ने सालिसिटर जनरल किसी अन्य सुनवाई में व्यस्त होने की बात कहकर मामले की सुनवाई की स्थगन की मांग की। इस पर पीठ ने जवाब दिया कि सरकार इस मामले को टालने के लिए अर्जी दाखिल नहीं कर सकती है, क्योंकि कार्यकाल समाप्त होने में सिर्फ एक माह का वक्त बचा है।