महाराष्ट्र: भाजपा के 12 विधायकों के निलंबन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, जानें पूरा मामला
Maharashtra News महाराष्ट्र विधानसभा से भाजपा के 12 विधायकों के निलंबन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। विधायकों को पीठासीन अधिकारी से दुर्व्यवहार के आरोप में एक साल के लिए निलंबित किया गया था।

नई दिल्ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के 12 भाजपा विधायकों के निलंबन को लेकर दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। भाजपा विधायकों ने एक साल तक निलंबित किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। बता दें कि भाजपा विधायकों को पीठासीन अधिकारी से कथित रूप से दुर्व्यवहार करने के आरोप में एक साल के लिए निलंबित कर दिया गया था।
जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत ने लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा है।
कोर्ट ने उठाए थे सवाल
इससे पहले मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एक साल तक निलंबन के लिए कोई उद्देश्य होना चाहिए। इसका जबरदस्त कारण होना चाहिए कि विधायकों को अगले सत्र में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। बेंच ने निरीक्षण में पाया कि विधानसभा से 12 विधायकों को निलंबित करने का प्रस्ताव प्रथम दृष्टया असंवैधानिक है क्योंकि संवैधानिक प्रतिबंध के कारण इस तरह का निलंबन छह महीने से अधिक नहीं हो सकता है।
बीते साल हुआ था निलंबन
बता दें कि बीते साल 5 जुलाई को विधानसभा के पीठासीन अधिकारी भास्कर जाधव के साथ अपमानजनक और दुर्व्यवहार करने के आरोप में भाजपा के 12 विधायकों को विधानसभा से निलंबित किया गया था। निलंबित किए गए 12 भाजपा विधायकों में आशीष शेलार, गिरिश महाजन, अभिमन्यु पवार, अतुल भातखलकर, नारायण कुचे, संजय कुटे, पराग अलवणी, राम सातपुते, हरीश पिंपले, जयकुमार रावल, योगेश सागर, कीर्ति कुमार बागडिया के नाम शामिल हैं।
निलंबन का प्रस्ताव संसदीय कामकाज मंत्री अनिल परभ लेकर आए थे। 22 जुलाई को विधायकों ने निलंबन के प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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