नई दिल्ली, प्रेट्र: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से सवाल किया कि उसने उन 34 महिला सैन्य अधिकारियों के बारे में क्या कदम उठाने का सोचा है जिन्होंने शीर्ष अदालत के निर्देशों पर 2020 में स्थायी कमीशन दिए जाने के बाद पदोन्नति में देरी का आरोप लगाया है। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ को केंद्र तथा सशस्त्र बलों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर. बालसुब्रमण्यम ने बताया कि 22 नवंबर को इस अदालत में पिछली सुनवाई के बाद से किसी अधिकारी को पदोन्नत नहीं किया गया है।

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महिला सैन्य अधिकारियों की पदोन्नति पर सुनवाई

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, 'यह मेरा दावा है। मैंने पिछली सुनवाई पर बयान दिया था, उसके बाद से किसी को पदोन्नत नहीं किया गया है।' पीठ ने कहा, 'हम शुक्रवार को इस पर सुनवाई करेंगे। हम सुनिश्चित करेंगे कि न्याय हो।' पीठ ने यह भी कहा, 'हम चाहते हैं कि आप हमें बताएं कि आप इन महिला अधिकारियों की अर्जी पर क्या करने वाले हैं।'इससे पहले शीर्ष अदालत ने 34 महिला अधिकारियों की याचिका पर केंद्र से जवाब देने को कहा था जिन्होंने स्थायी कमीशन दिए जाने के बाद पदोन्नति में देरी का आरोप लगाया था।

महिला सैन्य अधिकारियों ने दाखिल की थी याचिका

पीठ ने कहा था, 'हम चाहते हैं कि इन सभी महिला अधिकारियों को वरिष्ठता क्रम मिले।' कर्नल प्रियंवदा ए. मार्डीकर और कर्नल आशा काले समेत महिला सैन्य अधिकारियों ने याचिका दाखिल की थी जो स्थायी रूप से कमीशन प्राप्त अधिकारी हैं। उन्होंने कथित तौर पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए दावा किया कि दो महीने पहले बुलाए गए एक विशेष चयन बोर्ड ने कथित तौर पर उनसे बहुत जूनियर पुरुष अधिकारियों की पदोन्नति पर विचार किया था। इस पर पीठ ने पूछा था, 'आप पुरुष अधिकारियों के लिए चयन बोर्ड का आयोजन क्यों रहे हैं, महिलाओं के लिए क्यों नहीं?'

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Edited By: Amit Singh

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